
नई दिल्ली, 7 मई 2026 (वीकैंड रिपोर्ट)- LPG Gas Shortage : देशभर में रसोई गैस सिलेंडरों की कमी से आम लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सामान्य स्थिति पूरी तरह बहाल न होने के कारण एलपीजी की अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन अभी भी प्रभावित बनी हुई है। भारत अपनी घरेलू जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है और इसमें अधिकांश गैस खाड़ी देशों से इसी समुद्री मार्ग के जरिए आती है। ऐसे में सप्लाई प्रभावित होने का असर अब सीधे आम उपभोक्ताओं तक पहुंचने लगा है।
बुकिंग के बाद भी नहीं मिल रहे सिलेंडर
जानकारी के मुताबिक, कई शहरों और ग्रामीण इलाकों में उपभोक्ताओं को बुकिंग के बाद भी लंबे समय तक सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में डिलीवरी में कई-कई दिनों की देरी हो रही है, जबकि ग्रामीण इलाकों में लोगों को 20 से 30 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। कई गैस एजेंसियां उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी देने में भी असमर्थ नजर आ रही हैं, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
आम परिवारों की बढ़ी मुश्किलें
रसोई गैस की कमी का सबसे ज्यादा असर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है। गृहिणियों का कहना है कि घर का पूरा बजट बिगड़ चुका है। जिन घरों में सिर्फ एक सिलेंडर है, वहां गैस खत्म होने के बाद खाना बनाना तक मुश्किल हो गया है। कई परिवार मजबूरी में लकड़ी, कोयला और छोटे स्टोव का सहारा लेने लगे हैं।
LPG Gas Shortage : गैस एजेंसियों पर उमड़ रही भीड़
देश के कई हिस्सों में गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही लंबी लाइनें लग रही हैं। लोग लगातार एजेंसी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त स्टॉक न होने का हवाला दिया जा रहा है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि कई एजेंसियां समय पर सही जानकारी नहीं दे रहीं और डिलीवरी की तारीख बार-बार आगे बढ़ाई जा रही है। कुछ लोगों ने प्रशासन से गैस एजेंसियों के गोदामों की नियमित जांच और निगरानी की मांग भी की है, ताकि जमाखोरी और अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।
सप्लाई सामान्य होने में लग सकता है समय
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में कुछ एलपीजी टैंकर भारत के लिए रवाना हुए हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सप्लाई व्यवस्था को पूरी तरह सामान्य होने में अभी 2 से 3 महीने तक का समय लग सकता है। हालांकि पेट्रोलियम मंत्रालय और तेल कंपनियां लगातार हालात सामान्य करने के प्रयास कर रही हैं, लेकिन समुद्री सुरक्षा संकट और सीमित जहाज आवाजाही के कारण स्थिति अब भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
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