
जालंधर, 2 जुलाई 2026 (वीकैंड रिपोर्ट)- Maa Baglamukhi Dham Jalandhar : जालंधर के गुलमोहर सिटी, लम्मा पिंड चौक स्थित सिद्ध मां बगलामुखी धाम में मां बगलामुखी जी के पावन निमित्त सामूहिक निशुल्क दिव्य हवन-यज्ञ का भव्य आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक परंपरा के अनुसार ब्राह्मणों द्वारा विधिवत पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन और नवग्रह पूजन से हुई। इसके पश्चात मुख्य यजमान नवप्रीत सैनी एवं उनके परिवार ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-यज्ञ में आहुतियां अर्पित कर मां बगलामुखी का आशीर्वाद प्राप्त किया।
दिव्य हवन-यज्ञ के दौरान पूरा मंदिर परिसर वैदिक मंत्रों की गूंज, यज्ञ की पवित्र अग्नि और मां बगलामुखी के जयकारों से भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धाभाव के साथ हवन में भाग लिया और अपने परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्यता तथा मंगलमय जीवन की कामना करते हुए मां के चरणों में आस्था अर्पित की।

इस अवसर पर धाम के प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज ने श्रद्धालुओं को 108 मोतियों की माला के आध्यात्मिक महत्व के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि माला केवल उंगलियों से फेरने का साधन नहीं, बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि यदि हाथ माला फेरते रहें और मन संसार की इच्छाओं में भटकता रहे, तो वह जप अधूरा रह जाता है। वास्तविक साधना तब आरंभ होती है, जब भगवान का नाम केवल होंठों पर नहीं, बल्कि हृदय की प्रत्येक धड़कन में बस जाता है।
अपने प्रवचन के दौरान उन्होंने संत कबीरदास के प्रसिद्ध दोहे—
“माला तो कर में फिरै, जीभ फिरै मुख माँहि।
मनुआँ तो चहुँ दिसि फिरै, यह तो सुमिरन नाहिं॥”
का उल्लेख करते हुए कहा कि जब तक मन प्रभु के चरणों में स्थिर नहीं होता, तब तक जप का वास्तविक फल प्राप्त नहीं होता। उन्होंने कहा कि यदि हमारी प्रत्येक सांस में प्रभु का स्मरण, प्रत्येक कर्म में सेवा, प्रत्येक वचन में मधुरता और प्रत्येक विचार में करुणा समाहित हो जाए, तो पूरा जीवन ही भगवान के नाम की एक दिव्य माला बन जाता है।

Maa Baglamukhi Dham Jalandhar : नवजीत भारद्वाज ने आगे कहा कि संतों ने हमेशा सिखाया है कि भगवान को हाथों से गिनी जाने वाली माला नहीं, बल्कि निष्कलंक हृदय और सच्ची भावना प्रिय होती है। हाथों से माला फेरना आसान है, लेकिन मन को प्रभु के चरणों में स्थिर रखना ही वास्तविक तपस्या है। जिस दिन भक्ति बाहरी दिखावे से निकलकर आत्मा में उतर जाएगी, उसी दिन ईश्वर का वास्तविक अनुभव होने लगेगा।
उन्होंने कहा कि परमात्मा उसी हृदय में निवास करते हैं, जहां अहंकार समाप्त हो चुका हो, जहां क्षमा, प्रेम और सेवा का भाव हो तथा जहां प्रत्येक धड़कन भगवान के नाम का स्मरण करती हो। ऐसा जीवन ही वास्तव में सफल, सार्थक और धन्य माना जाता है।
श्रद्धालुओं को जीवन की नश्वरता का स्मरण कराते हुए उन्होंने कहा कि एक दिन यह शरीर मिट्टी में मिल जाएगा। धन, वैभव, पद, प्रतिष्ठा और रिश्ते यहीं रह जाएंगे, जबकि मनुष्य के साथ केवल प्रभु का नाम और उसके सत्कर्म ही जाएंगे। उन्होंने सभी भक्तों से प्रेरणादायक संकल्प लेने का आह्वान किया कि केवल 108 मनकों की माला गिनने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने जीवन के 108 दोषों को भी दूर करने का प्रयास करें। क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या, लोभ, छल और द्वेष जैसे विकारों का त्याग कर प्रेम, दया, क्षमा और सेवा को अपने जीवन का आधार बनाएं।

प्रवचन के समापन पर नवजीत भारद्वाज ने भावुक शब्दों में कहा, “हाथों की माला एक दिन टूट सकती है, लेकिन हृदय की माला कभी नहीं टूटती। जिस हृदय में प्रभु का निवास हो जाता है, वहां भय, दुख और अकेलापन स्वतः समाप्त हो जाते हैं। वहां केवल शांति, प्रेम, भक्ति और परम आनंद का वास होता है।” उनके प्रेरणादायक विचारों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक रूप से भावविभोर कर दिया।
Maa Baglamukhi Dham Jalandhar : कार्यक्रम में समाज के अनेक गणमान्य लोग एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। समीर कपूर, विक्की अग्रवाल, अमरेंद्र कुमार शर्मा, सौरभ भाटिया, मुनीष मैहरा, ऋषभ कालिया, रिंकू सैनी, कमलजीत, बलजिंदर सिंह, बावा खन्ना, अमरजीत सिंह, रोहित भाटिया, राकेश शर्मा, प्रदीप वर्मा, गौरव गोयल, रवि भल्ला सहित सैकड़ों भक्तों ने हवन-यज्ञ में भाग लेकर मां बगलामुखी का आशीर्वाद प्राप्त किया।

हवन-यज्ञ की पूर्णाहुति के पश्चात श्रद्धालुओं के लिए विशाल लंगर भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सभी ने प्रसाद ग्रहण कर धार्मिक आयोजन का पुण्य लाभ प्राप्त किया।
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