
नई दिल्ली, 26 मई 2026 (वीकैंड रिपोर्ट)- LPG-PNG New Rules : एलपीजी गैस सिलेंडर उपभोक्ताओं के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। नई अधिसूचना के अनुसार अब जिन परिवारों ने पाइप से आने वाली गैस यानी PNG कनेक्शन ले लिया है, वे लंबे समय तक LPG और PNG दोनों सुविधाएं एक साथ नहीं रख पाएंगे। सरकार ने साफ किया है कि पीएनजी कनेक्शन लेने के बाद उपभोक्ता तुरंत एलपीजी सिलेंडर रिफिल नहीं करवा सकेंगे।
30 दिन के भीतर करना होगा फैसला
नई व्यवस्था के तहत उपभोक्ताओं को 30 दिनों के भीतर अपना LPG कनेक्शन सरेंडर करना होगा या फिर उसे ऐसे क्षेत्र में ट्रांसफर करना होगा जहां PNG सुविधा उपलब्ध नहीं है। इस फैसले के बाद शहरी इलाकों में रहने वाले लाखों परिवार प्रभावित हो सकते हैं।
शहरों में सबसे ज्यादा असर
अब तक कई परिवार रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए PNG का उपयोग करते थे, लेकिन बैकअप के तौर पर LPG सिलेंडर भी अपने पास रखते थे। कई बार पाइपलाइन गैस सप्लाई बंद होने, मेंटेनेंस या तकनीकी खराबी की स्थिति में लोग सिलेंडर का इस्तेमाल कर लेते थे। इसी वजह से दोनों गैस सिस्टम साथ रखने का चलन तेजी से बढ़ रहा था।
LPG-PNG New Rules : अब चुनना होगा एक गैस सिस्टम
नए नियम लागू होने के बाद लोगों को अब एक ही गैस सुविधा चुननी पड़ सकती है। इस फैसले ने खासकर उन परिवारों की चिंता बढ़ा दी है जो इमरजेंसी स्थिति में बैकअप गैस को जरूरी मानते हैं।
सरकार ने क्यों लिया फैसला?
सरकार लगातार देशभर में PNG नेटवर्क का विस्तार कर रही है। बड़े शहरों में पाइप गैस व्यवस्था तेजी से बढ़ाई जा रही है और माना जा रहा है कि इसी वजह से ड्यूल गैस सिस्टम पर रोक लगाने जैसा कदम उठाया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे गैस वितरण व्यवस्था को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा।
LPG सप्लाई पर कम होगा दबाव
माना जा रहा है कि इस फैसले से LPG सिलेंडर सप्लाई, लॉजिस्टिक्स और सब्सिडी सिस्टम पर पड़ने वाला दबाव भी कम हो सकता है। सरकार अब उन इलाकों में LPG उपलब्धता बढ़ाने पर फोकस कर सकती है जहां अभी PNG नेटवर्क नहीं पहुंचा है।
उपभोक्ताओं के मन में कई सवाल
नई अधिसूचना सामने आने के बाद उपभोक्ताओं के बीच कई सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि अगर किसी दिन PNG सप्लाई बंद हो जाए तो खाना कैसे बनेगा? कई परिवारों ने LPG सिलेंडर को सुरक्षित बैकअप विकल्प बताया है।
LPG-PNG New Rules : नियमों को लेकर असमंजस
फिलहाल सरकार की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि नियम का पालन नहीं करने पर क्या कार्रवाई होगी। इसके अलावा गैस कंपनियां इस व्यवस्था की निगरानी कैसे करेंगी, इसे लेकर भी लोगों के मन में सवाल बने हुए हैं।
बढ़ सकती है बहस
सरकार के इस फैसले के बाद अब शहरी उपभोक्ताओं के बीच नई बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे गैस व्यवस्था सुधारने वाला कदम मान रहे हैं, जबकि कई उपभोक्ता इसे असुविधाजनक बता रहे हैं। फिलहाल लोगों की नजर अब सरकार और गैस कंपनियों की अगली गाइडलाइन पर टिकी हुई है।
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