





पटियाला (वीकैंड रिपोर्ट)- 450 Delegates Along with Chandumajra Leave the Akali Dal : पंजाब की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। विधानसभा हलका सनौर के पूर्व विधायक हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा ने अकाली दल पुनर सुरजीत से अपने सभी संबंध तोड़ने का ऐलान कर दिया है। उनके साथ हलका सनौर की पार्टी की पूरी टीम, ब्लॉक सदस्य, जिला और प्रदेश स्तर के पदाधिकारी, सर्कल प्रधान, करीब 450 डेलीगेट्स और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के सदस्य जरनैल सिंह करतारपुर ने भी पार्टी से अलग होने की घोषणा की है। यह पार्टी ज्ञानि हरप्रीत सिंह के नेतृत्व में काम कर रही थी।
विचार और कार्यशैली में तालमेल नहीं, इसलिए लिया फैसला
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा ने कहा कि जब किसी पार्टी के विचारों और काम करने के तरीके में तालमेल न हो, तो ऐसे माहौल में साथ चलना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि वे अपने मन और पार्टी हाईकमान, दोनों का बोझ कम करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने एक दिन पहले ही पार्टी से अलग होने का फैसला लिया था। आज सनौर हलके के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी इस फैसले का समर्थन किया है।
2017 में विपरीत हालात के बावजूद जीते थे चुनाव
हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा ने सनौर हलके के राजनीतिक इतिहास का जिक्र करते हुए बताया कि 1977 के दौर में यह क्षेत्र डकाला के नाम से जाना जाता था। वर्ष 1985 में यहां के लोगों ने प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा को कम उम्र में विधायक चुनकर विधानसभा भेजा था। उन्होंने कहा कि लगातार तीन दशक तक पार्टी को चुनावों में हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में विपरीत राजनीतिक माहौल के बावजूद सनौर के लोगों ने उन पर भरोसा जताया और उन्हें जीत दिलाई। उन्होंने कहा कि चंदूमाजरा परिवार का इस इलाके के साथ राजनीतिक ही नहीं, बल्कि पारिवारिक और भावनात्मक रिश्ता भी है।
450 Delegates Along with Chandumajra Leave the Akali Dal : पार्टी की गतिविधियां सोशल मीडिया और बयानों तक सीमित रहने का आरोप
पूर्व विधायक ने बताया कि प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा के पार्टी छोड़ने के फैसले के बाद इलाके के नेताओं और कार्यकर्ताओं के लगातार फोन आने लगे थे। इसके बाद प्रमुख नेताओं की बैठक बुलाई गई, जिसमें सभी ने पार्टी की मौजूदा कार्यशैली पर असंतोष जताया। उनका आरोप था कि मौजूदा सरकार की नीतियों और कथित नाकामियों के खिलाफ जिस तरह सड़क पर उतरकर विरोध करना चाहिए था, वैसी भूमिका पार्टी नहीं निभा पा रही थी। पार्टी की गतिविधियां सोशल मीडिया और अखबारों में बयानबाजी तक सीमित होकर रह गई थीं।
पंथक एकता के लिए एक मंच पर आने की अपील का समर्थन
हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा ने कहा कि प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने सभी पंथक संगठनों और धड़ों से एक मंच और एक झंडे के नीचे एकजुट होने की अपील की है। सनौर हलका इस अपील का पूरा समर्थन करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अकाली दल पुनर सुरजीत से अलग होने का फैसला पंथक एकता और पंजाब के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
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