
जालंधर (वीकैंड रिपोर्ट)- Shani Dev Maharaj Hawan : मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में श्री शनिदेव महाराज जी के निमित सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया। सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान अमरेंद्र कुमार शर्मा से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई। सिद्ध मां बगलामुखी धाम में आयोजित दिव्य हवन यज्ञ के पावन अवसर पर पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा, मंत्रों की दिव्य ध्वनि और भक्तों की श्रद्धा से आलोकित हो उठा। इस अवसर पर धाम के प्रेरक प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज ने संगत को संबोधित करते हुए धन-धन गुरु नानक देव जी महाराज के पावन वचनों का स्मरण कराया—
‘‘नानक फिकै बोलिऐ तनु मनु फिका होइ’’

अर्थात् जो मनुष्य कटु, कड़वे और अपमानजनक वचन बोलता है, उसका तन और मन दोनों ही अशांत हो जाते हैं। उसके भीतर की शांति समाप्त होने लगती है और उसकी वाणी उसके अंदर छिपे विकारों का दर्पण बन जाती है। उन्होंने समझाया कि मनुष्य अचानक कुछ नहीं बोलता, बल्कि पहले विचार जन्म लेते हैं और वही विचार शब्दों के रूप में बाहर आते हैं। यदि मन में ईर्ष्या, क्रोध, घृणा और अहंकार भरा हो, तो वाणी भी वैसी ही हो जाती है। इसलिए गुरमत सबसे पहले मन को पवित्र करने की शिक्षा देती है, क्योंकि मन जैसा होगा, वाणी भी वैसी ही होगी।
नवजीत भारद्वाज ने संगत को वर्तमान समय का उदाहरण देते हुए कहा कि आज इंसान के बोलने का तरीका बदल गया है। पहले लोग सामने कटु वचन बोलते थे, लेकिन अब सोशल मीडिया, मोबाइल और संदेशों के माध्यम से अपनी कड़वाहट फैलाते हैं। धर्म, समाज, समाचार या किसी व्यक्ति के प्रति अभद्र टिप्पणियाँ करना लोगों की आदत बनती जा रही है। उन्होंने कहा, ‘‘याद रखिए शब्द केवल लिखे नहीं जाते, वे मनुष्य के संस्कार और चरित्र को भी प्रकट कर देते हैं।’’

Shani Dev Maharaj Hawan : उन्होंने कहा कि कठोर वाणी वाला व्यक्ति स्वयं भी भीतर से अशांत रहता है। वह हर समय तनाव, क्रोध और मानसिक अशांति में जीता है। धीरे-धीरे उसका मन अशांत और शरीर रोगी होने लगता है। कटु वचन केवल सामने वाले को ही नहीं दुख देते, बल्कि बोलने वाले को भी भीतर से समाप्त कर देते हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि तलवार का घाव समय के साथ भर जाता है, लेकिन जुबान से दिया गया घाव जीवनभर चुभता रहता है।
संगत को गुरबाणी का संदेश समझाते हुए नवजीत भारद्वाज ने कहा, ‘‘मिठत नीवी नानका, गुण चंगिआईआ ततु।’’ अर्थात् मिठास और विनम्रता ही सभी गुणों का सार है। मीठा बोलने में कोई धन नहीं लगता, लेकिन इससे दिल जीते जा सकते हैं। मधुर वाणी टूटे हुए मन को भी शांति प्रदान करती है और प्रेम से बोले गए दो शब्द किसी के लिए मरहम बन जाते हैं। जहाँ मीठी वाणी होती है, वहाँ सुख, शांति और परमात्मा की कृपा स्वत: ही आ जाती है। अंत में उन्होंने संगत को प्रेरित करते हुए कहा कि आज सभी यह संकल्प करें कि हमारी वाणी में मिठास, विनम्रता, प्रेम और अध्यात्म की सुगंध हो, ताकि हमारे शब्द किसी के दिल को ठेस पहुँचाने के बजाय उसे शीतलता और सुकून प्रदान करें।

इस अवसर पर राकेश प्रभाकर,पूनम प्रभाकर ,सरोज बाला, समीर कपूर, विक्की अग्रवाल,प्रदीप,जानू थापर,दिनेश चौधरी,नरेश,कोमल, ऋषभ कालिया,उदय ,अजीत कुमार , नरेंद्र ,रोहित भाटिया,बावा जोशी,राकेश शर्मा,नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत,दानिश, रितु, कुमार, गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू, गुलशन शर्मा,संजीव शर्मा, रोहित भाटिया,मुकेश, रजेश महाजन ,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा, ऐडवोकेट शर्मा,वरुण, नितिश,रोमी, भोला शर्मा,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल, रवि भल्ला,जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल, अनिल,सागर,दीपक,प्रिंस कुमार, दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ,दीपक कुमार, नरेश,दिक्षित, अनिल, कमल नैयर, अजय सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।
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