
जालंधर (वीकैंड रिपोर्ट)- Maa Baglamukhi Dham Hawan : मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में मां बगलामुखी जी के निमित्त सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया। सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान सुनील शर्मा से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई। सिद्ध माँ बगलामुखी धाम में अलौकिक हवन कुंड में प्रज्वलित पावन अग्नि अपनी आभा बिखेर रही थी। चारों ओर गूंजते मंत्रों की ध्वनि वातावरण को इतना पवित्र बना रही थी कि मानो स्वयं देवता भी वहाँ उपस्थित हों। श्रद्धालु भक्ति में लीन थे, और हर चेहरा आध्यात्मिक शांति से दमक रहा था।

इसी पावन क्षण में प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज जी ने अपने प्रवचनों से हर माँ भक्तों के हृदय को भीतर तक झकझोर दिया। उन्होंने बड़ी सहजता लेकिन गहरी भावना के साथ कहा, ‘‘जब हम इस संसार में आते हैं, तो हमारी पहली सांस के साथ जो पहला शब्द जुड़ता है, वह है ‘माँ’ और जब जीवन की अंतिम सांस निकलती है, तब भी जो नाम सबसे पहले हमारे होंठों पर आता है, वह भी ‘माँ’ ही होता है।’’
उन्होंने आगे कहा, ‘‘भक्तों! ‘माँ’ कोई साधारण शब्द नहीं है। यह एक भावना है एक शक्ति है, एक ऐसा स्वरूप है जिसमें पूरा ब्रह्मांड समाया हुआ है।’’

नवजीत भारद्वाज जी ने धर्मग्रंथों का उल्लेख करते हुए कहा, मातृ देवो भव— अर्थात माँ को देवता के समान मानो। फिर उन्होंने समाज की सच्चाई पर प्रश्न उठाया, ‘‘हम धार्मिक स्थानों में जाकर भगवान के आगे सिर झुकाते हैं, लेकिन क्या हम अपने घर में बैठी माँ के सामने उतने ही विनम्र हैं? या हमारा सिर अहंकार से ऊँचा रहता है?’’ यह सुनकर सभा में गहरा मौन छा गया। उन्होंने भावुक होकर कहा, ‘‘जरा सोचिए-जब आप बचपन में गिरते थे, तो सबसे पहले कौन दौडक़र आता था? माँ’’ ‘‘जब आपको बुखार आता था, तो कौन पूरी रात जागता था? माँ’’ ‘‘जब पूरी दुनिया आपको गलत समझती थी, तब कौन बिना शर्त आपके साथ खड़ी रहती थी? माँ’’फिर उन्होंने एक मार्मिक कथा सुनाई एक बेटा अपनी माँ को वृद्धाश्रम छोडक़र जा रहा था। जाते-जाते माँ ने कहा ‘बेटा, अगर अगला जन्म मिले, तो मैं फिर तेरी माँ बनना चाहती हूँ।’

बेटा रुक गया, उसकी आँखों में आँसू आ गए। उसने कहा, ‘‘माँ, मैंने आपको यहाँ छोड़ दिया, फिर भी आप मुझसे इतना प्यार करती हो?’’
माँ मुस्कुराई और बोली, ‘‘बेटा, माँ का दिल ऐसा ही होता है वो तुम्हारी गलतियों को नहीं देखता, बस तुम्हें देखता है।’’ यह सुनकर सभा में कई लोगों की आँखें नम हो गईं। नवजीत भारद्वाज जी ने कहा, भक्तों! यही सच्चाई है। चाहे हमारी जन्म देने वाली माँ हो या जगत जननी माँ बगलामुखी, माँ कभी अपने बच्चों को नहीं छोड़ती, लेकिन हम ही उसे अकेला छोड़ देते हैं। उन्होंने आगे कहा, जब माँ बूढ़ी हो जाती है, उसके हाथ काँपते हैं, वह बातें भूलने लगती है। तब हम चिढ़ जाते हैं। लेकिन हम यह भूल जाते हैं कि जब हम छोटे थे, हम भी एक ही सवाल बार-बार पूछते थे और माँ ने कभी गुस्सा नहीं किया। ‘‘जिस माँ ने तुम्हें चलना सिखाया आज समय आ गया है कि तुम उसे सहारा दो’’

फिर उन्होंने अत्यंत भावुक स्वर में कहा— अगर आपकी माँ आज भी जीवित है, तो समझ लीजिए कि भगवान आपके घर में ही विराजमान हैं। उनके चरणों को स्पर्श करें, उनका आशीर्वाद लें, उनके साथ बैठें, उनकी बातें सुनें। क्योंकि एक दिन ऐसा आएगा, ‘‘जब घर में सब कुछ होगा धन होगा, सुविधा होगी, लोग होंगे, लेकिन माँ नहीं होगी’’ और उस दिन आपके आँसू रुकेंगे नहीं। सभा पूरी तरह भावनाओं में डूब चुकी थी। अंत में उन्होंने हाथ जोडक़र कहा, आज ही अपनी माँ को गले लगाइए उनसे कहिए— ‘माँ, मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ।’’ माँ को कभी मत रुलाना, क्सयोंकि माँ के आँसू भगवान के दिल को भी चीर देते हैं। हवन-यज्ञ पूजा अर्चना उपरांत ढोल, नगाड़ों, शंखनाद के बीच मंत्रोचारण के साथ विधीवत रूप से ध्वजारोहण किया गया।

इस अवसर पर श्वेता भारद्वाज,पूजा शर्मा, पल्लवी अग्रवाल,राकेश प्रभाकर,पूनम प्रभाकर ,सरोज बाला, नवनीत कुमार,नवदीप कुमार, समीर कपूर, विक्की अग्रवाल, अमरेंद्र कुमार शर्मा,गगन मल्होत्रा,प्रदीप , दिनेश सेठ,सौरभ भाटिया,विवेक अग्रवाल, जानू थापर,दिनेश चौधरी,नरेश,कोमल,वेद प्रकाश, मुनीष मैहरा, जगदीश डोगरा, ऋषभ कालिया,रिंकू सैनी, कमलजीत,बलजिंदर सिंह,उदय ,अजीत कुमार , नरेंद्र ,रोहित भाटिया,राकेश शर्मा, अमरेंद्र सिंह,नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत,मनीष शर्मा, डॉ गुप्ता,परमजीत सिंह, दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू, गुलशन शर्मा,संजीव शर्मा, रोहित भाटिया,मुकेश, रजेश महाजन ,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा, ऐडवोकेट शर्मा,वरुण, नितिश,रोमी, भोला शर्मा,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल , अश्विनी शर्मा , रवि भल्ला, भोला शर्मा, जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक,दसोंधा सिंह, प्रिंस कुमार, पप्पू ठाकुर, दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ,दीपक कुमार, नरेश,दिक्षित, अनिल, कमल नैयर, अजय,बलदेव सिंह भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।
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