

जालंधर (वीकैंड रिपोर्ट)- Maa Baglamukhi Dham Jalandhar : मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में मां बगलामुखी जी निमित सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया। सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमानो से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।

दिव्य हवन यज्ञ के पावन अवसर पर आज विशेष रूप से जालंधर के मेयर एवं जालंधर नॉर्थ के हल्का इंचार्ज विनीत धीर जी सिद्ध माँ बगलामुखी धाम पहुंचे। उन्होंने विधिवत माँ बगलामुखी के श्रीचरणों में नतमस्तक होकर पूजा-अर्चना की तथा दिव्य हवन यज्ञ में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस दौरान उन्होंने माँ बगलामुखी से प्रदेश और समाज की सुख-समृद्धि, शांति तथा जनकल्याण की कामना करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया। धाम के पावन एवं आध्यात्मिक वातावरण में उन्होंने हवन की पूर्णाहुति में भी सहभागिता निभाई और माँ की असीम कृपा का प्रसाद ग्रहण किया।

सिद्ध माँ बगलामुखी धाम में आयोजित दिव्य हवन यज्ञ के दौरान अलौकिक हवन कुंड में प्रज्वलित पावन अग्नि अपनी दिव्य आभा बिखेर रही थी। वैदिक मंत्रोच्चारण की मधुर ध्वनि से संपूर्ण धाम भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो उठा। इस पावन अवसर पर धाम के पीठ उपासक नवजीत भारद्वाज ने अमृतमयी वाणी से श्रद्धालुओं को भगवान के नाम-सिमरन की महिमा का रसपान कराया।
उन्होंने कहा कि आज का यह दिव्य सत्संग भगवान के पवित्र नाम की महिमा का सत्संग है। यदि आज एक भी हृदय में प्रभु-नाम का दीपक प्रज्वलित हो जाए, तो यही इस सत्संग की सबसे बड़ी सफलता होगी।

Maa Baglamukhi Dham Jalandhar : नवजीत भारद्वाज ने कहा कि कलियुग की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि आज मनुष्य के पास भौतिक सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं, लेकिन मन की शांति समाप्त होती जा रही है। बड़े-बड़े मकान हैं, पर परिवारों में प्रेम का अभाव है। बैंक बैलेंस बढ़ रहे हैं, लेकिन संतोष घटता जा रहा है। हाथों में मोबाइल है, लेकिन जिह्वा पर भगवान का नाम नहीं। सोशल मीडिया पर हजारों मित्र हैं, लेकिन परमात्मा से आत्मिक संबंध टूटता जा रहा है। सुबह उठते ही लोग भगवान का स्मरण करने के बजाय मोबाइल देखने लगते हैं और रात को आत्मचिंतन के स्थान पर स्क्रीन देखते-देखते सो जाते हैं। फिर मन अशांत होने की शिकायत करते हैं।

उन्होंने कहा कि संतों का स्पष्ट संदेश है कि जिस मन में भगवान का नाम नहीं होता, वहाँ संसार का शोर भर जाता है। इस आंतरिक शोर को शांत करने का सबसे सरल और सर्वोत्तम उपाय गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्रीरामचरितमानस में बताया है—
“कलियुग केवल नाम अधारा।
सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा॥”
उन्होंने कहा कि सतयुग में तप, त्रेतायुग में यज्ञ और द्वापर में पूजा का विशेष महत्व था, किंतु कलियुग में भगवान के नाम-सिमरन से बढ़कर कोई साधना नहीं है। भगवान का नाम केवल उच्चारण नहीं, बल्कि स्वयं परमात्मा की चेतना है। ‘राम’ केवल दो अक्षर नहीं, ‘कृष्ण’ केवल एक नाम नहीं और ‘राधे’ केवल पुकार नहीं, बल्कि दिव्य अनुभूति का माध्यम हैं। जिस हृदय में प्रभु का नाम बस जाता है, वहाँ स्वयं भगवान का निवास हो जाता है।

नाम-सिमरन की महिमा बताते हुए उन्होंने भक्त प्रह्लाद का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि प्रह्लाद के पास न सेना थी, न धन और न कोई सांसारिक शक्ति, लेकिन उनके पास भगवान ‘नारायण’ का नाम था। अग्नि, हाथी, विषैले सर्प और अनेक अत्याचार भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सके। अंततः भगवान श्री नृसिंह स्वयं प्रकट होकर अपने भक्त की रक्षा के लिए आए। उन्होंने कहा कि जहाँ सच्चे भाव से भगवान का नाम लिया जाता है, वहाँ स्वयं भगवान को भी आना पड़ता है।

Maa Baglamukhi Dham Jalandhar : उन्होंने ध्रुव महाराज का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि मात्र पाँच वर्ष की आयु में नारद मुनि के उपदेश पर ध्रुव ने वन में बैठकर भगवान का अखंड नाम-स्मरण किया। उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं भगवान वैकुण्ठ से प्रकट हुए। उन्होंने कहा कि जो भगवान का नाम नहीं छोड़ता, भगवान भी उसका साथ कभी नहीं छोड़ते ।

अजामिल के प्रसंग का उल्लेख करते हुए नवजीत भारद्वाज ने कहा कि यद्यपि उसका जीवन पापमय था, किंतु अंतिम समय में उसने अपने पुत्र को पुकारते हुए ‘नारायण’ नाम का उच्चारण किया। भगवान के नाम की महिमा ऐसी थी कि विष्णुदूत उसकी रक्षा के लिए पहुँच गए। उन्होंने कहा कि यदि अंतिम क्षण में लिया गया एक नाम इतना प्रभावशाली हो सकता है, तो जो व्यक्ति जीवनभर श्रद्धा और प्रेम से प्रभु का नाम जपता है, उसका कल्याण कितना महान होगा, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

प्रवचन के समापन पर उन्होंने विशेष रूप से बच्चों में धार्मिक संस्कारों के महत्व पर बल देते हुए कहा कि आज माता-पिता अपने बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर और अधिकारी बनाने का सपना देखते हैं, जो अत्यंत सराहनीय है, लेकिन उससे पहले उन्हें एक अच्छा इंसान बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अच्छे संस्कारों की पहली पाठशाला भगवान का नाम है। भक्त प्रह्लाद को गर्भ में नारद मुनि का सत्संग मिला, ध्रुव को बाल्यावस्था में भगवान का मंत्र प्राप्त हुआ, लव-कुश ने महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में रामकथा का श्रवण किया और भगवान श्रीकृष्ण ने भी बचपन से गोप-बालकों को धर्म, प्रेम और करुणा का मार्ग दिखाया। यदि बच्चों को बचपन से ही भगवान के नाम-सिमरन का संस्कार दिया जाए, तो बुरे संस्कार उनके जीवन में प्रवेश करने से पहले ही समाप्त हो जाते हैं।

उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि घर लौटकर अपने बच्चों को प्रतिदिन भगवान का नाम अवश्य सिखाएँ। सुबह उठते ही “जय श्रीराम” का स्मरण करें, भोजन से पूर्व प्रभु का धन्यवाद करें और रात्रि में सोने से पहले कम से कम दस बार भगवान का नाम जपें। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से घर का वातावरण स्वतः भक्तिमय, शांत और आनंदमय बन जाएगा। अंत में सभी श्रद्धालुओं से संकल्प करवाते हुए नवजीत भारद्वाज ने कहा, “हम प्रतिदिन भगवान के नाम का सिमरन करेंगे, अपने बच्चों को भी प्रभु-भक्ति और सदाचार के संस्कार देंगे तथा अपने घर को केवल ईंट-पत्थर का भवन नहीं, बल्कि भगवान के नाम से गूँजता हुआ एक जीवंत मंदिर बनाएँगे।”

Maa Baglamukhi Dham Jalandhar : इस अवसर पर कंठ जज, श्वेता भारद्वाज, निर्मल शर्मा,सरोज बाला, समीर कपूर,अमरेंद्र कुमार शर्मा,प्रदीप , दिनेश सेठ,सौरभ भाटिया,जानू थापर,नरेश,कोमल, मुनीष मैहरा,ऋषभ कालिया,रिंकू बलजिंदर सिंह, उदय ,अजीत कुमार , नरेंद्र ,रोहित भाटिया, नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत,मनीष शर्मा, डॉ गुप्ता,दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू, गुलशन शर्मा,संजीव शर्मा,मुकेश,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, रवि भल्ला, भोला शर्मा, जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक,दसोंधा सिंह, प्रिंस कुमार, दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ,दीपक कुमार सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे। हवन य्ज्ञ उपरांत विशाल लंगर भंडारे का आयोजन किया गया।
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