
नई दिल्ली, 17 जून 2026 (वीकैंड रिपोर्ट)- Telegram Ban : 21 जून को होने वाले NEET री-एग्जाम से पहले केंद्र सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram पर अस्थायी रोक लगा दी है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की सिफारिश पर आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत कार्रवाई करते हुए Telegram को 22 जून तक ब्लॉक करने का आदेश जारी किया है। सरकार के इस फैसले के बाद सोशल मीडिया और शिक्षा जगत में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर कार्रवाई केवल Telegram पर ही क्यों हुई और WhatsApp को इससे बाहर क्यों रखा गया।
मैसेज एडिटिंग फीचर बना जांच एजेंसियों की चिंता
NEET पेपर लीक मामले की जांच के दौरान एजेंसियों को Telegram के एक फीचर के दुरुपयोग के अहम सबूत मिले। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ गिरोह Telegram के मैसेज एडिटिंग फीचर का इस्तेमाल कर पुराने संदेशों में बदलाव कर उन्हें पेपर लीक का प्रमाण बताकर छात्रों को गुमराह कर रहे थे। बताया गया कि चैनल एडमिन पुराने टाइमस्टैम्प को बरकरार रखते हुए मैसेज एडिट कर प्रश्नपत्र जैसी सामग्री अपलोड कर देते थे। बाद में इन एडिटेड मैसेजों के स्क्रीनशॉट वायरल कर यह दावा किया जाता था कि परीक्षा से पहले ही पेपर लीक हो चुका था।
Telegram Ban : पब्लिक चैनलों के जरिए फैला ठगी का नेटवर्क
जांच एजेंसियों के अनुसार Telegram की सबसे बड़ी ताकत उसके पब्लिक चैनल हैं, जहां एक साथ लाखों लोगों तक जानकारी पहुंचाई जा सकती है। इसी सुविधा का फायदा उठाकर कुछ संगठित गिरोह मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को निशाना बना रहे थे। एजेंसियों का मानना है कि Telegram पर बने बड़े-बड़े सार्वजनिक चैनलों के माध्यम से फर्जी पेपर, झूठे दावे और कथित लीक सामग्री बड़े पैमाने पर प्रसारित की जा रही थी, जिससे छात्रों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही थी।
WhatsApp क्यों नहीं हुआ बैन?
जांच में WhatsApp की किसी संदिग्ध भूमिका के प्रमाण सामने नहीं आए। विशेषज्ञों के अनुसार WhatsApp का सिस्टम Telegram की तुलना में अधिक सीमित और निजी है। यहां अकाउंट मोबाइल नंबर से जुड़े होते हैं और अधिकांश बातचीत व्यक्तिगत या सीमित समूहों तक ही रहती है। Telegram की तरह WhatsApp पर बड़े सार्वजनिक चैनल और खुले ब्रॉडकास्ट नेटवर्क उपलब्ध नहीं हैं, जिससे अनजान लोगों तक बड़े पैमाने पर पहुंच बनाना अपेक्षाकृत कठिन होता है। यही वजह है कि जांच एजेंसियों ने Telegram को कार्रवाई के दायरे में लिया, जबकि WhatsApp पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया।
परीक्षा की पारदर्शिता बनाए रखना उद्देश्य
सरकार का कहना है कि यह कदम NEET री-एग्जाम की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। अधिकारियों के अनुसार परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले किसी भी प्लेटफॉर्म या नेटवर्क के खिलाफ आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
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