

धर्म डेस्क (वीकैंड रिपोर्ट)- Shri Krishna Janmashtami 2026 Date : भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाने वाली जन्माष्टमी हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है। इस दिन भक्त भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की पूजा-अर्चना करते हैं, व्रत रखते हैं और मध्यरात्रि में विधि-विधान से जन्मोत्सव मनाते हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी जन्माष्टमी की तिथि और पूजा के शुभ मुहूर्त को लेकर लोगों में उत्सुकता बनी हुई है। ऐसे में आइए जानते हैं कि वर्ष 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कब मनाई जाएगी और इसका धार्मिक महत्व क्या है।
कब है श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026?
वैदिक पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की तिथि मानी जाती है। इस वर्ष जन्माष्टमी पर विशेष जयंती योग का निर्माण हो रहा है, जिसे अत्यंत शुभ माना गया है।
अष्टमी तिथि प्रारंभ: 3 सितंबर 2026, रात्रि 12:26 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त: 4 सितंबर 2026, रात्रि 12:14 बजे
वहीं रोहिणी नक्षत्र का आरंभ 3 सितंबर की रात 11:30 बजे होगा और यह 4 सितंबर की रात 12:14 बजे तक रहेगा। अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग के आधार पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026 (शुक्रवार) को मनाई जाएगी।
इस बार बन रहा है दुर्लभ जयंती योग
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का संयोग बनता है, तो उसे ‘जयंती जन्माष्टमी’ कहा जाता है। इस वर्ष मध्यरात्रि में अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में चंद्रमा का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसे शुभ योग में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा, व्रत और भजन-कीर्तन करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है तथा जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का आगमन होता है।
Shri Krishna Janmashtami 2026 Date : क्या है जन्माष्टमी का धार्मिक महत्व?
पुराणों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी, रोहिणी नक्षत्र और मध्यरात्रि में हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी पर इन तीनों का संयोग अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक जन्माष्टमी का व्रत रखने और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने से पापों का नाश होता है, संतान सुख की प्राप्ति होती है और पितरों को भी मोक्ष का मार्ग मिलता है। पद्म पुराण सहित कई ग्रंथों में जन्माष्टमी व्रत की महिमा का वर्णन मिलता है।
जन्माष्टमी पूजा विधि
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ एवं पीले, सफेद या गुलाबी वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल को साफ करके लड्डू गोपाल या श्रीकृष्ण की प्रतिमा स्थापित करें।
- भगवान को नए वस्त्र पहनाकर फूल-माला, धूप और दीप से पूजा करें।
- पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
- मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाएं।
- दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से पंचामृत अभिषेक करें।
- लड्डू गोपाल का सुंदर श्रृंगार कर उन्हें पालने में झूला झुलाएं।
- माखन-मिश्री, खीर, पंजीरी, फल और तुलसी युक्त पंचामृत का भोग लगाएं।
- भगवान की आरती कर प्रसाद का वितरण करें।
व्रत के नियम
जन्माष्टमी व्रत रखने वाले भक्त दिनभर फलाहार कर सकते हैं। अधिकांश श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद व्रत खोलते हैं, जबकि कुछ लोग अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करते हैं। जो भक्त व्रत नहीं रख सकते, वे भी श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
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