
धर्म डेस्क (वीकैंड रिपोर्ट)- Malmas 2026 : क्या आप जानते हैं कि साल 2026 आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है? इस वर्ष अधिक मास, जिसे पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहा जाता है, आने वाला है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पवित्र महीना हर तीसरे साल आता है और इसे भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है।
अगर आप इस दौरान व्रत, पूजा या कोई धार्मिक अनुष्ठान करने की योजना बना रहे हैं, तो पहले इसका सही समय और नियम जान लेना बेहद जरूरी है।
अधिक मास 2026 कब से कब तक रहेगा?
संवत 2083 में ज्येष्ठ मास को अधिक मास के रूप में माना जाएगा। यह अवधि 17 मई 2026 से 15 जून 2026 तक रहेगी।
महत्वपूर्ण तिथियां:
शुद्ध ज्येष्ठ (कृष्ण पक्ष): 2 मई – 16 मई 2026
अधिक मास प्रारंभ: 17 मई 2026
अधिक ज्येष्ठ (शुक्ल पक्ष): 17 मई – 31 मई 2026
अधिक ज्येष्ठ (कृष्ण पक्ष): 1 जून – 15 जून 2026
अधिक मास समाप्त: 15 जून 2026
शुद्ध ज्येष्ठ (शुक्ल पक्ष): 16 जून – 29 जून 2026
ध्यान देने वाली बात: अधिक मास में पहले शुक्ल पक्ष और फिर कृष्ण पक्ष आता है।
Malmas 2026 : क्यों खास है पुरुषोत्तम मास?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब इस महीने को “मलमास” कहकर उपेक्षित किया गया, तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम देकर “पुरुषोत्तम मास” बना दिया।
इसलिए इस महीने में किए गए दान, जप और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
अधिक मास में क्या करें?
इस पवित्र अवधि में कुछ विशेष कार्य अत्यंत शुभ माने गए हैं:
33 मालपुए का दान: कांसे के पात्र में 33 मालपुए रखकर ब्राह्मण को दान करना पुण्यदायी होता है।
तीर्थ स्नान: पवित्र नदियों में स्नान और कथा श्रवण मोक्षदायक माना जाता है।
मंत्र जाप:
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप विशेष फल देता है।
भक्ति और ध्यान: नियमित पूजा-पाठ और ध्यान करने से मानसिक शांति मिलती है।
Malmas 2026 : अधिक मास में क्या न करें?
शास्त्रों के अनुसार इस दौरान कुछ कार्यों से बचना चाहिए:
नया व्रत या संकल्प शुरू न करें
किसी व्रत का उद्यापन न करें
विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य न करें
निष्कर्ष
साल 2026 का पुरुषोत्तम मास केवल एक धार्मिक अवधि नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का सुनहरा अवसर है।
भले ही इस समय मांगलिक कार्य वर्जित हों, लेकिन भक्ति, दान और साधना के लिए यह सबसे उत्तम समय माना गया है।
यदि आप जीवन की परेशानियों से मुक्ति और पितृ शांति चाहते हैं, तो इस पूरे महीने भगवान विष्णु की भक्ति जरूर करें।
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