
जालंधर (वीकैंड रिपोर्ट)- Shri Shani Dev Maharaj Hawan : मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में श्री शनिदेव महाराज जी के निमित सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया। सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई। सिद्ध मां बगलामुखी धाम में आयोजित दिव्य हवन यज्ञ के दौरान आध्यात्मिक वातावरण अपने चरम पर था। पावन हवन कुंड में प्रज्वलित अग्नि की दिव्य आभा और वैदिक मंत्रोच्चारण की गूंज से संपूर्ण धाम भक्तिमय हो उठा। इसी अवसर पर प्रेरक प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए भगवान श्रीकृष्ण और उनके प्रिय सखा मन्सुका की मित्रता का भावपूर्ण वर्णन किया।

उन्होंने कहा कि संसार में अनेक रिश्ते बनते हैं, लेकिन सच्चा मित्र वही होता है जो हर परिस्थिति में साथ खड़ा रहे। भगवान श्रीकृष्ण के बाल-सखा मन्सुका का नाम इसलिए अमर है क्योंकि उसके मन में केवल और केवल श्याम का वास था।
इस अवसर पर नवजीत भारद्वाज जी ने कहा—
“मन्सुका मन में बस गया, श्याम बसे जिस ठौर।
मित्रता ऐसी हो गई, भूल गया सब और॥”
उन्होंने इन पंक्तियों का भावार्थ बताते हुए कहा कि जिस हृदय में भगवान का निवास हो जाता है, वहां संसार की मोह-माया स्वतः ही छोटी पड़ जाती है। मन्सुका को न धन की लालसा थी, न मान-सम्मान की चिंता। उसका एकमात्र उद्देश्य अपने प्रिय कान्हा के प्रेम में जीवन व्यतीत करना था। आज मनुष्य अक्सर अपने स्वार्थ के लिए भगवान को याद करता है, जबकि मन्सुका ने भगवान को केवल प्रेम के लिए चाहा था।

प्रवचन के दौरान उन्होंने भक्तों को अध्यात्म का अमृतपान कराते हुए कहा—
“मन्सुका बोले श्याम से, तुम बिन कौन सहाई।
जीवन की हर राह में, तेरी प्रीत निभाई॥”
उन्होंने कहा कि यह केवल दो पंक्तियां नहीं, बल्कि पूर्ण समर्पण की पराकाष्ठा हैं। जब जीवन में अंधकार छा जाए, जब अपने भी साथ छोड़ दें, तब यदि कोई साथ रहता है तो वह प्रभु का नाम है। मन्सुका का विश्वास अटूट था कि संसार भले ही साथ छोड़ दे, लेकिन श्याम कभी अपने भक्त का हाथ नहीं छोड़ते।
प्रवचन के समापन पर नवजीत भारद्वाज ने भावुक शब्दों में कहा—
“मित्र वही मन्सुका बना, जिसने प्रेम निभाय।
सुख-दुख में जो साथ दे, वही सखा कहलाय॥”
उन्होंने कहा कि आज अधिकांश रिश्ते समय और स्वार्थ के आधार पर निभाए जाते हैं, लेकिन सच्ची मित्रता वही है जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अडिग रहे। जैसे दानवीर कर्ण ने मित्रता निभाई, जैसे सुदामा ने प्रेम निभाया, वैसे ही मन्सुका ने श्रीकृष्ण के चरणों में अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया।

नवजीत भारद्वाज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि भगवान को केवल ज्ञान से नहीं, बल्कि प्रेम से पाया जा सकता है। उन्हें तर्क से नहीं, समर्पण से प्राप्त किया जा सकता है। जिस दिन मनुष्य अपने हृदय में मन्सुका जैसा निष्कलंक प्रेम और श्रीकृष्ण जैसा विश्वास स्थापित कर लेता है, उसी दिन उसका जीवन धन्य हो जाता है। उन्होंने कहा, “जब मन मन्सुका बन जाए और हृदय में श्याम बस जाएं, तब जीवन का प्रत्येक क्षण प्रभु कृपा का उत्सव बन जाता है।”
इस अवसर पर श्वेता भारद्वाज,सरोज बाला, समीर कपूर, विक्की अग्रवाल, अमरेंद्र कुमार शर्मा, जानू थापर,ॠषभ कालिया,अजीत कुमार , नरेंद्र ,रोहित भाटिया,बावा जोशी,राकेश शर्मा, नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत ,जोगिंदर सिंह, मनीष शर्मा, दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,रोहित भाटिया,मुकेश,वरुण, नितिश,रोमी, विशाल , अश्विनी शर्मा , रवि भल्ला,जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,प्रिंस कुमार, पप्पू ठाकुर, दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ,दीपक कुमार, नरेश,दिक्षित, अनिल,अजय, मुनीश मैहरा,नरेंद्र मैहरा सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।
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