
जालंधर (वीकेंड रिपोर्ट) Shri shanidev havan :- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में श्री शनिदेव महाराज जी के निमित सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान अमित अग्रवाल से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।
Shri shanidev havan
सिद्ध माँ बगलामुखी धाम में अलौकिक हवन कुंड में प्रज्वलित पावन अग्नि अपनी दिव्य आभा बिखेर रही थी। चारों ओर गूंज रहे वैदिक मंत्रों की पावन ध्वनि ने वातावरण को इतना आध्यात्मिक बना दिया था कि मानो स्वयं देवी-देवताओं का आशीर्वाद वहाँ बरस रहा हो। श्रद्धालु पूर्ण श्रद्धा और भक्ति में लीन थे तथा हर चेहरा आत्मिक शांति और आनंद से दमक रहा था।
इसी पावन अवसर पर प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज ने प्रसिद्ध सूफी संत बुल्ले शाह की अमर वाणी का उल्लेख करते हुए कहा—
“इक नुकते विच गल्ल मुकदी ए,
फड़ नुकता छोड़ हिसाबां नूं,
कर दूर कुफ़र दिआं बाबां नूं।
बुल्ला बात सच्ची कदों रूकदी ए,
इक नुकते विच गल्ल मुकदी ए।”

नवजीत भारद्वाज जी ने बड़े भावपूर्ण शब्दों में श्रद्धालुओं को समझाया कि संतों और फकीरों की वाणी सदैव मानवता, प्रेम, सच्चाई और परमात्मा से जुड़ने की प्रेरणा देती है। सूफी संत बुल्ले शाह जी अपनी इस वाणी के माध्यम से यही संदेश देते हैं कि जीवन का वास्तविक सार बाहरी आडंबरों में नहीं, बल्कि मन की पवित्रता और आत्मा की निर्मलता में छिपा हुआ है।
उन्होंने कहा कि आज का इंसान छोटी-छोटी बातों का हिसाब रखने में अपना जीवन व्यर्थ कर रहा है—किसने सम्मान दिया, किसने अपमान किया, किसने साथ छोड़ा और किसने दुख पहुँचाया। इन्हीं बातों में उलझकर मन अशांत और बेचैन हो जाता है। जहां हिसाब-किताब शुरू होता है, वहीं प्रेम समाप्त होने लगता है।
नवजीत भारद्वाज जी ने कहा कि *“फड़ नुकता छोड़ हिसाबां नूं”* का अर्थ है कि अपने मन से शिकायतों, द्वेष और नफरत के बोझ को उतार फेंको। परमात्मा तक पहुँचने का मार्ग प्रेम, दया, विनम्रता और सेवा से होकर गुजरता है। मनुष्य मंदिरों, गुरुद्वारों और तीर्थों में माथा टेकता है, माला फेरता है, भजन-कीर्तन करता है, लेकिन यदि उसके मन में अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या और स्वार्थ भरा हो, तो उसकी भक्ति अधूरी रह जाती है।

Shri shanidev havan उन्होंने आगे कहा कि सच्ची इबादत वही है, जहाँ किसी दुखी का सहारा बना जाए, भूखे को भोजन मिले, निराश व्यक्ति को उम्मीद मिले और हर इंसान के प्रति दया तथा प्रेम का भाव रखा जाए। यही सेवा वास्तव में प्रभु भक्ति का सर्वोच्च रूप है।
नवजीत भारद्वाज जी ने *“कर दूर कुफ़र दिआं बाबां नूं”* की व्याख्या करते हुए कहा कि अपने भीतर बैठे घमंड, लालच, नफरत और स्वार्थ को समाप्त करना ही सच्चा धर्म है। मन का अंधकार ही सबसे बड़ा अधर्म है। जब मन निर्मल और पवित्र हो जाता है, तब हर दिशा में परमात्मा का ही प्रकाश दिखाई देने लगता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि संतों की वाणी हमें यह सिखाती है कि धर्म केवल पूजा-पाठ या बाहरी कर्मकांड का नाम नहीं है, बल्कि अच्छे विचार, मधुर वाणी, सेवा, करुणा और इंसानियत ही सच्चा धर्म है।
अंत में उन्होंने सभी प्रभु भक्तों से आह्वान किया कि अपने जीवन में प्रेम को अपनाइए, सेवा को अपनाइए, क्षमा को अपनाइए और अपने मन को परमात्मा के चरणों से जोड़िए। क्योंकि वास्तव में वही इंसान सफल और धन्य है, जिसके हृदय में मालिक का नाम और समस्त मानवता के लिए प्रेम बसता है।
इस अवसर पर श्वेता भारद्वाज, निर्मल शर्मा,सरोज बाला, समीर कपूर, विवेक अग्रवाल,नरेश,कोमल,वेद प्रकाश, ऋषभ कालिया,उदय ,अजीत कुमार,रोहित भाटिया,बावा जोशी,राकेश शर्मा,नवीन, मनीष शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,संजीव शर्मा, रोहित भाटिया,मुकेश, रजेश महाजन ,अमनदीप शर्मा,अमन शर्मा, नितिश,रोमी, रवि भल्ला, भोला शर्मा, जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक,दसोंधा सिंह, प्रिंस कुमार, नरेंद्र, सौरभ,दीपक कुमार, नरेश,दिक्षित, अनिल सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।
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