
नई दिल्ली, 20 मई 2026 (वीकैंड रिपोर्ट)- India Oman Trade Deal : भारत और ओमान के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रेड एग्रीमेंट अगले महीने 1 जून 2026 से लागू हो सकता है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इसके संकेत देते हुए कहा कि सरकार आयात पर निर्भरता कम कर निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है और ओमान के साथ हुआ यह समझौता उसी रणनीति का हिस्सा है।
यह समझौता कई मायनों में बेहद खास माना जा रहा है। साल 2006 के बाद पहली बार ओमान ने किसी देश के साथ इतनी बड़ी ट्रेड डील की है। इससे पहले उसने अमेरिका के साथ समझौता किया था। वहीं खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के किसी देश के साथ भारत का यह दूसरा बड़ा समझौता है। इससे पहले भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हुआ था।
99% भारतीय उत्पादों को मिलेगा जीरो टैरिफ एक्सेस
भारत और ओमान के बीच दिसंबर 2025 में व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते के तहत भारत से ओमान निर्यात होने वाले 99.38% उत्पादों को जीरो टैरिफ कैटेगरी में रखा गया है। यानी भारतीय सामान बिना भारी टैक्स के ओमान के बाजार तक पहुंच सकेगा।
इसके बदले भारत ने भी अपनी कुल टैरिफ लाइन में से 77.79% पर राहत देने की पेशकश की है, जिससे ओमान से आने वाले 94.81% सामानों को फायदा मिलेगा।
India Oman Trade Deal : 10 अरब डॉलर पार पहुंचा व्यापार
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 10.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। इसमें भारत ने ओमान को लगभग 4.06 अरब डॉलर का माल निर्यात किया, जबकि ओमान से 6.5 अरब डॉलर का आयात हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि नया समझौता लागू होने के बाद आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार में बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है।
किन सेक्टर्स को होगा सबसे ज्यादा फायदा?
सरकारी जानकारी के मुताबिक इस समझौते से भारत के कई श्रम-प्रधान उद्योगों को बड़ा फायदा मिलेगा। इनमें जेम्स एंड ज्वेलरी, टेक्सटाइल, चमड़ा, जूते, स्पोर्ट्स गुड्स, प्लास्टिक, फर्नीचर, इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स, फार्मा सेक्टर, मेडिकल उपकरण और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री शामिल हैं।
इसके अलावा भारत के आयुष और आयुर्वेदिक दवाओं के लिए भी ओमान एक बड़ा नया बाजार बन सकता है।
वहीं बदले में भारत ओमान से आने वाले खजूर, संगमरमर और पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर शुल्क में कटौती करेगा।
सर्विस सेक्टर और भारतीयों को भी फायदा
यह समझौता सिर्फ माल व्यापार तक सीमित नहीं है। इसमें सर्विस सेक्टर और श्रमिकों की आवाजाही को लेकर भी कई राहतें शामिल हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक पश्चिम एशिया के देशों में करीब 6.75 लाख भारतीय रहते हैं। ओमान दुनिया भर से लगभग 12.52 अरब डॉलर की सेवाएं आयात करता है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी 5.31% है।
नई डील के बाद भारतीय प्रोफेशनल्स, आईटी कंपनियों और सर्विस सेक्टर से जुड़े कारोबारियों को ओमान में नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
India Oman Trade Deal : होर्मुज स्ट्रेट के कारण ओमान क्यों है बेहद अहम?
इस ट्रेड डील की अहमियत सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है। मौजूदा समय में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर मंडराते संकट के बीच ओमान भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण साझेदार बनकर उभरा है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। जहां उत्तर की ओर ईरान का प्रभाव है, वहीं दक्षिणी हिस्से पर ओमान का नियंत्रण माना जाता है।
ओमान खुद भी क्रूड ऑयल और LNG उत्पादक देश है और भारत वहां से तेल व गैस खरीदता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ता है, तो भारत ओमान के बंदरगाहों और लॉजिस्टिक सपोर्ट के जरिए अपनी सप्लाई चेन को बनाए रख सकता है।
यही वजह है कि भारत-ओमान ट्रेड डील को सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है।
-----------------------------------------------------------------
देश-दुनिया की ताजा खबरों के लिए >>>Join WhatsApp Group Join<<< करें। आप हमें >>>Facebook<<< फॉलो कर सकते हैं। लेटेस्ट खबरें देखने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल को भी सबस्क्राइब करें।
-----------------------------------------------------------------


