
नई दिल्ली, 19 मई 2026 (वीकैंड रिपोर्ट)- Medical Store Strike : देशभर में 20 मई को दवाइयों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। अखिल भारतीय रसायनज्ञ एवं औषधि विक्रेता संगठन (AIOCD) ने बुधवार को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इस संगठन से करीब 12.4 लाख केमिस्ट, फार्मासिस्ट और दवा डिस्ट्रीब्यूटर जुड़े हुए हैं, जिसके चलते देश के कई राज्यों में मेडिकल स्टोर बंद रहने की संभावना जताई जा रही है।
यह हड़ताल ऑनलाइन फार्मेसी और इंस्टेंट मेडिसिन डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ की जा रही है। केमिस्ट संगठनों का आरोप है कि ऑनलाइन दवा कंपनियां बिना स्पष्ट और सख्त नियमों के काम कर रही हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा के साथ-साथ छोटे मेडिकल स्टोर्स का कारोबार भी खतरे में पड़ गया है।
क्यों भड़के केमिस्ट?
AIOCD का कहना है कि ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म्स पर कई बार बिना सही जांच के दवाइयां बेची जा रही हैं। संगठन के मुताबिक, कुछ ऑनलाइन कंपनियां फर्जी या अधूरे प्रिस्क्रिप्शन पर भी दवाइयों की डिलीवरी कर रही हैं, जो मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
इसके अलावा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भारी डिस्काउंट को लेकर भी केमिस्टों में नाराजगी है। दवा विक्रेताओं का कहना है कि बड़ी कंपनियां 40 से 50 प्रतिशत तक छूट देकर बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा पैदा कर रही हैं, जबकि छोटे मेडिकल स्टोर्स इतने बड़े डिस्काउंट देने में सक्षम नहीं हैं।
Medical Store Strike : सरकार से क्या मांग कर रहे हैं केमिस्ट?
AIOCD ने सरकार से दो अहम नोटिफिकेशन — GSR 220(E) और GSR 817(E) — को वापस लेने की मांग की है।
GSR 817(E) करीब आठ साल पहले लाया गया एक ड्राफ्ट नियम था, जिसका उद्देश्य भारत में ई-फार्मेसी के लिए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार करना था। इसमें ऑनलाइन दवा बिक्री, रजिस्ट्रेशन, प्रिस्क्रिप्शन वेरिफिकेशन और नियम उल्लंघन पर कार्रवाई जैसी व्यवस्थाएं शामिल थीं। हालांकि यह नियम आज तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाया।
वहीं GSR 220(E) कोरोना महामारी के दौरान लागू किया गया था ताकि मरीजों को घर बैठे दवाइयां उपलब्ध कराई जा सकें। अब केमिस्ट संगठनों का आरोप है कि ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियां इसी नियम का फायदा उठाकर बड़े स्तर पर दवाइयों की बिक्री कर रही हैं।
मरीजों की सुरक्षा पर भी उठे सवाल
दवा विक्रेताओं का कहना है कि ऑफलाइन मेडिकल स्टोर्स को हर दवा बेचने के लिए डॉक्टर का वैध प्रिस्क्रिप्शन जांचना पड़ता है। कई दवाओं के लिए रिकॉर्ड और रजिस्टर भी मेंटेन करने होते हैं।
लेकिन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कथित तौर पर एआई से बने प्रिस्क्रिप्शन या गलत दस्तावेजों के आधार पर भी दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे प्रतिबंधित और नशीली दवाओं के गलत इस्तेमाल का खतरा बढ़ सकता है।
क्या पूरी तरह बंद रहेंगी मेडिकल दुकानें?
संगठन ने कहा है कि हड़ताल के दौरान कई जगह इमरजेंसी दवा सेवाएं चालू रखी जा सकती हैं, ताकि गंभीर मरीजों को परेशानी न हो। हालांकि सामान्य मेडिकल स्टोर्स बंद रहने से आम लोगों को दवाइयां खरीदने में दिक्कत आ सकती है।
लोगों से अपील की गई है कि वे अपनी जरूरी दवाइयों का इंतजाम पहले ही कर लें।
Medical Store Strike : सरकार और CDSCO की प्रतिक्रिया
हाल ही में AIOCD प्रतिनिधियों ने देश की शीर्ष दवा नियामक संस्था केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के अधिकारियों से मुलाकात की थी। संगठन का कहना है कि उन्हें सिर्फ समीक्षा का आश्वासन मिला है।
वहीं स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि ई-फार्मेसी से जुड़ा मामला अभी विचाराधीन है। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि कुछ राज्यों के केमिस्ट संगठन इस हड़ताल में शामिल नहीं होंगे, लेकिन AIOCD का दावा है कि आंदोलन देशभर में प्रभावी रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऑनलाइन और ऑफलाइन फार्मेसी के लिए समान नियम नहीं बनाए गए, तो आने वाले समय में यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता है।
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