

जालंधर (वीकैंड रिपोर्ट) Music Education and Research day : हंस राज महिला महाविद्यालय के संगीत गायन विभाग ने ‘संगीत शिक्षा और शोध पद्धति में शिक्षाविदों की भूमिका’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का उद्देश्य संगीत क्षेत्र में शिक्षकों की शैक्षणिक भूमिका को रेखांकित करना और प्रतिभागियों को शोध के मूल सिद्धांतों तथा आधुनिक शोध पद्धतियों से परिचित कराना था। कार्यक्रम में संगीत शिक्षण की बदलती प्रवृत्तियों और शोध की दिशा पर गंभीर विचार-विमर्श किया गया।
Music Education and Research day : सत्र की शुरुआत एक भावपूर्ण सरस्वती वंदना के साथ हुई, जिसमें विद्या की देवी का आशीर्वाद मांगा गया। कार्यशाला में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक के संगीत विभाग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर एवं पूर्व अध्यक्ष डॉ. रवि शर्मा द्वारा संचालित दो ज्ञानवर्धक सत्र शामिल थे। पहले सत्र में डॉ. शर्मा ने संगीत शिक्षा में शिक्षाविदों की भूमिका पर चर्चा की और औपचारिक शिक्षण के माध्यम से संगीत प्रतिभा को पोषित करने और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण में एक संरचित शैक्षणिक ढांचे के महत्व पर बल दिया।
सत्र में स्नातकोत्तर और शोध विद्वानों की उत्साही भागीदारी देखी गई, जिन्होंने विचारशील प्रश्न उठाए और इंटरैक्टिव चर्चाओं में भाग लिया। कार्यशाला का समापन औपचारिक धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।
Music Education and Research day : कार्यशाला में संगीत गायन विभाग के संकाय सदस्यों डॉ प्रेम सागर, संगीत गायन विभाग के प्रमुख, सुश्री गुंजन कपूर, श्री प्रदुम्न और श्री जसमेल की उपस्थिति रही, जिनकी सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम के शैक्षणिक माहौल को समृद्ध किया। इस अवसर की शैक्षणिक गरिमा को बढ़ाते हुए, विभाग के प्रतिष्ठित प्रमुख डॉ ममता, प्रमुख, अंग्रेजी विभाग; डॉ अश्मीन, प्रमुख, मनोविज्ञान विभाग; और डॉ नवरूप, प्रमुख, पंजाबी विभाग भी उपस्थित थे। प्राचार्य प्रो डॉ (श्रीमती) अजय सरीन ने कार्यशाला के लिए विभाग को बधाई दी और कहा
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