
नई दिल्ली, 19 जून 2026 (वीकैंड रिपोर्ट)- El Nino Impact on India : भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 2026 की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है। केरल में मॉनसून सामान्य से थोड़ी देरी से पहुंचा और शुरुआती बारिश भी कई राज्यों में कमजोर दर्ज की गई। इसी बीच मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि आने वाले महीनों में अल-नीनो (El Niño) का असर देश के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा कर सकता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस साल पूरे मॉनसून सीजन में सामान्य से कम यानी लगभग 90-92 प्रतिशत लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) बारिश होने का अनुमान जताया है। यदि यह अनुमान सही साबित हुआ तो देश के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
क्या है अल-नीनो और क्यों बढ़ी चिंता?
अल-नीनो एक वैश्विक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसके कारण हवाओं और वर्षा के पैटर्न में बदलाव आता है, जिसका सीधा असर भारत के मॉनसून पर पड़ता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जून में इसका प्रभाव सीमित रहेगा, लेकिन जुलाई, अगस्त और सितंबर में इसकी तीव्रता बढ़ सकती है। अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA और IMD के आकलन के मुताबिक जुलाई-अगस्त के दौरान अल-नीनो विकसित होने की संभावना 80 से 90 प्रतिशत तक है।
कमजोर मॉनसून ने बढ़ाई किसानों की परेशानी
जून के पहले दो सप्ताह में महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में बारिश सामान्य से 70 से 80 प्रतिशत तक कम दर्ज की गई है। मध्य भारत और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भी वर्षा की कमी देखी जा रही है। इसका असर खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ने लगा है। धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और दालों जैसी फसलों के उत्पादन पर खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश औसत से कम रही तो खाद्यान्न उत्पादन में 10 से 15 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है।
El Nino Impact on India : जल संकट और बिजली उत्पादन पर भी खतरा
कम बारिश का असर सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रहेगा। जलाशयों में पानी का स्तर घट सकता है, जिससे सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक जरूरतों के लिए संकट खड़ा हो सकता है। हाइड्रो पावर परियोजनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं, क्योंकि बिजली उत्पादन के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध होना जरूरी है। इसके साथ ही देश में पहले से पड़ रही भीषण गर्मी और अधिक बढ़ सकती है, जिससे हीटवेव की घटनाओं में वृद्धि होने की आशंका है।
बढ़ सकती है महंगाई, प्रभावित हो सकती है अर्थव्यवस्था
फसल उत्पादन घटने की स्थिति में सब्जियों, दालों और अनाज की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। खाद्य महंगाई बढ़ने से आम जनता पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नीतियों पर भी असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कृषि क्षेत्र प्रभावित हुआ तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और देश की विकास दर पर भी दबाव बढ़ सकता है।
सरकार और वैज्ञानिकों की तैयारी
संभावित सूखे को देखते हुए सरकार ने कई जिलों में राहत योजनाओं की तैयारी शुरू कर दी है। फसल बीमा योजनाओं को मजबूत किया जा रहा है और किसानों को समय-समय पर मौसम संबंधी सलाह जारी की जा रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि भारतीय महासागर द्विध्रुव (IOD) सकारात्मक स्थिति में आता है तो अल-नीनो के कुछ नकारात्मक प्रभाव कम हो सकते हैं, लेकिन फिलहाल स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने की जरूरत है। विशेषज्ञों के अनुसार जल संरक्षण, सूखा-रोधी फसलों और आधुनिक सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा देकर इस चुनौती का सामना किया जा सकता है।
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