
नई दिल्ली, 19 जून 2026 (वीकैंड रिपोर्ट)- Naresh Gujral Cyber Fraud : देश में साइबर अपराध लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं और अब इनके निशाने पर सिर्फ आम लोग ही नहीं, बल्कि बड़े राजनीतिक और कारोबारी परिवार भी हैं। ताजा मामला पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के बेटे और पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल से जुड़ा है, जिनकी कंपनी को करीब 7.8 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का सामना करना पड़ा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ठगों ने WhatsApp पर नरेश गुजराल की तस्वीर (DP) लगाकर उनकी पहचान का फर्जी इस्तेमाल किया। इसके बाद कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी को मैसेज भेजकर तत्काल धनराशि ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए।
अधिकारी को लगा कि संदेश स्वयं नरेश गुजराल की ओर से भेजा गया है, इसलिए उसने बिना किसी संदेह के पहली बार करीब 1.5 करोड़ रुपये RTGS के जरिए ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद अगले चार दिनों तक अलग-अलग बहानों से रकम मांगी जाती रही और अधिकारी लगातार पैसे भेजता रहा। देखते ही देखते कुल 7.8 करोड़ रुपये ठगों के बताए बैंक खातों में पहुंच गए।
बैंक को हुआ शक, फिर भी जारी रहे ट्रांजैक्शन
इतनी बड़ी रकम के लेन-देन को देखकर बैंक अधिकारियों को संदेह हुआ और उन्होंने कंपनी के CFO से संपर्क किया। हालांकि CFO ने भी यह मान लिया कि निर्देश नरेश गुजराल की ओर से ही दिए गए हैं, जिसके चलते ट्रांजैक्शन जारी रहे। मामले में बड़ा मोड़ तब आया जब 16 जून को संबंधित अधिकारी को कुछ संदेह हुआ। उसने नरेश गुजराल की बेटी दीक्षा गुजराल से संपर्क कर पूरी जानकारी दी। यह सुनकर परिवार हैरान रह गया क्योंकि नरेश गुजराल ने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया था।
Naresh Gujral Cyber Fraud : ई-एफआईआर दर्ज, 4 करोड़ रुपये हुए फ्रीज
साइबर फ्रॉड का पता चलते ही परिवार ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। 16 जून को ई-एफआईआर दर्ज की गई, जिसके बाद दिल्ली पुलिस की विशेष इकाई ने जांच शुरू कर दी। जांच के दौरान जिस बैंक खाते में रकम भेजी गई थी, उसे ट्रैक किया गया। राहत की बात यह रही कि ठगी गई राशि का बड़ा हिस्सा अभी भी उसी खाते में मौजूद था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करीब 4 करोड़ रुपये ट्रेस कर फ्रीज कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आमतौर पर साइबर अपराधी रकम मिलते ही उसे कई खातों में बांट देते हैं, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ, जिससे बड़ी रकम बचाई जा सकी।
साइबर एक्सपर्ट की सलाह
- WhatsApp पर मिले किसी भी वित्तीय निर्देश की दोबारा पुष्टि करें।
- केवल DP देखकर किसी नंबर पर भरोसा न करें।
- बड़ी रकम ट्रांसफर करने से पहले कॉल या वीडियो कॉल के जरिए पुष्टि करें।
- अनजान नंबरों से आए निर्देशों पर तुरंत कार्रवाई न करें।
- कंपनी स्तर पर दोहरी वेरिफिकेशन प्रक्रिया लागू करें।
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