
चंडीगढ़, 16 जून 2026 (वीकैंड रिपोर्ट)- High Court Ruling for Live In Relationship : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे एक जोड़े को पुलिस सुरक्षा देने से इनकार करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि भारतीय समाज में विवाह एक पवित्र और मान्यता प्राप्त संस्था है तथा घर छोड़कर लिव-इन रिलेशनशिप में रहना केवल व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला नहीं, बल्कि माता-पिता के सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा से भी जुड़ा विषय है। यह फैसला जस्टिस संदीप मौदगिल की बेंच ने पटियाला निवासी एक युवक और युवती की याचिका पर सुनाया। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि वे बालिग हैं, एक-दूसरे से प्रेम करते हैं और भविष्य में विवाह करना चाहते हैं। परिवार के विरोध के चलते उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए पुलिस संरक्षण की मांग की थी।
सिर्फ साथ रहने से नहीं मिलेगा कानूनी संरक्षण
हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि केवल कुछ दिनों तक साथ रहने का दावा कर पुलिस सुरक्षा नहीं मांगी जा सकती। किसी संबंध को कानूनी रूप से लिव-इन रिलेशनशिप मानने के लिए कुछ आवश्यक शर्तों का पूरा होना जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों का विवाह योग्य आयु का होना और समाज में पति-पत्नी की तरह रहना ऐसे संबंधों की अहम शर्तों में शामिल है। मामले में याचिका में स्वयं स्वीकार किया गया है कि युवक अभी विवाह की कानूनी आयु पूरी नहीं कर पाया है और भविष्य में उम्र पूरी होने पर शादी करने की बात कही गई है।
High Court Ruling for Live In Relationship : माता-पिता के सम्मान का भी है अधिकार
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके माता-पिता को भी समान रूप से प्राप्त है। कोर्ट ने कहा कि घर छोड़कर जाने वाले बच्चों के ऐसे कदम कई बार परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा और सम्मान को प्रभावित करते हैं। इसलिए हर मामले को केवल व्यक्तिगत स्वतंत्रता के दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता।
भारतीय संस्कृति और सामाजिक मूल्यों का किया उल्लेख
हाईकोर्ट ने कहा कि भारत विविध परंपराओं, संस्कृतियों और सामाजिक मूल्यों वाला देश है, जहां विवाह को विशेष सामाजिक और कानूनी मान्यता प्राप्त है। भले ही समाज का एक वर्ग आधुनिक जीवनशैली और पश्चिमी संस्कृति से प्रभावित होकर लिव-इन रिलेशनशिप को अपना रहा हो, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि प्रत्येक ऐसे संबंध को स्वतः कानूनी संरक्षण प्रदान कर दिया जाए। इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने याचिका खारिज करते हुए संबंधित जोड़े को पुलिस सुरक्षा देने से साफ इनकार कर दिया।
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