
धर्म डेस्क (वीकैंड रिपोर्ट)- Shani Dev Story : शनिदेव को हिंदू धर्म में न्याय का देवता और कर्मों का सच्चा फल देने वाला ग्रह माना जाता है। मान्यता है कि शनिदेव व्यक्ति के अच्छे और बुरे कर्मों के अनुसार ही फल देते हैं, इसलिए उन्हें न्यायाधीश भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और विधि-विधान से शनिदेव की पूजा करने पर जीवन की परेशानियां कम होती हैं और शनि दोष, साढ़ेसाती तथा ढैय्या जैसी बाधाओं से राहत मिलती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि शनिदेव हमेशा सिर झुकाकर क्यों चलते हैं और उनकी चाल इतनी धीमी क्यों मानी जाती है? इसके पीछे बेहद रोचक और रहस्यमयी पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं।
क्यों मानी जाती है शनिदेव की दृष्टि इतनी प्रभावशाली?
पौराणिक कथा के अनुसार, जब शनिदेव युवा अवस्था में थे, तब उनके पिता सूर्य देव ने उनका विवाह एक तेजस्वी और तपस्विनी कन्या से कराया। एक दिन उनकी पत्नी संतान प्राप्ति की इच्छा लेकर उनके पास पहुंचीं, लेकिन उस समय शनिदेव भगवान कृष्ण के ध्यान में पूरी तरह लीन थे। काफी देर तक प्रतीक्षा करने के बाद उनकी पत्नी क्रोधित हो गईं और उन्होंने शनिदेव को श्राप दे दिया कि अब से वे जिस पर भी दृष्टि डालेंगे, उसका अनिष्ट होगा। जब शनिदेव का ध्यान टूटा तो उन्होंने पत्नी को शांत करने की कोशिश की, लेकिन श्राप वापस नहीं लिया जा सका। कहा जाता है कि तभी से शनिदेव अपनी दृष्टि नीचे रखकर चलते हैं, ताकि किसी को उनकी नजर से कष्ट न पहुंचे।
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Shani Dev Story : शनिदेव की चाल धीमी क्यों मानी जाती है?
एक अन्य कथा के अनुसार, भगवान शिव के परम भक्त दधीचि मुनि के घर पिप्पलाद नाम के पुत्र का जन्म हुआ। जन्म से पहले ही उनके पिता का निधन हो चुका था और माता भी सती हो गई थीं। जब पिप्पलाद बड़े हुए तो उन्होंने देवताओं से अपने माता-पिता की मृत्यु का कारण पूछा। देवताओं ने इसके लिए शनिदेव की दृष्टि को जिम्मेदार बताया। यह सुनकर पिप्पलाद क्रोधित हो गए और उन्होंने शनिदेव पर ब्रह्मदंड से प्रहार कर दिया।
ब्रह्मदंड के प्रहार से बदली शनिदेव की चाल
कथा के अनुसार, ब्रह्मदंड के प्रहार से बचने के लिए शनिदेव तीनों लोकों में भागते रहे, लेकिन अंततः वह उनके पैर में आकर लगा। इससे उनके पैर में गंभीर चोट आ गई और वे लंगड़े हो गए। इसी कारण शनिदेव की गति अन्य ग्रहों की तुलना में धीमी मानी जाती है और उन्हें “मंद गति वाला ग्रह” कहा जाता है।
शिवभक्तों को लेकर दिया था विशेष वचन
बाद में देवताओं के आग्रह पर पिप्पलाद मुनि का क्रोध शांत हुआ और उन्होंने शनिदेव को क्षमा कर दिया। हालांकि उन्होंने एक शर्त रखी कि शनिदेव 16 वर्ष तक के शिवभक्तों को कष्ट नहीं देंगे। तभी से ऐसी मान्यता है कि पिप्पलाद मुनि का स्मरण करने और शनिदेव की श्रद्धा से पूजा करने पर शनि से जुड़ी परेशानियों में राहत मिल सकती है।
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