
तेहरान (वीकैंड रिपोर्ट)- IRGC new commander in chief : पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। Israel Defense Forces (आईडीएफ) द्वारा कथित तौर पर चलाए गए ‘ऑपरेशन रोअरिंग लॉयन’ के बीच ईरान के सैन्य ढांचे में बड़ा बदलाव सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलों में जनरल मोहम्मद पाकपुर समेत कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को निशाना बनाया गया।
अहमद वाहिदी बने नए कमांडर-इन-चीफ
ईरानी मीडिया के अनुसार, ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी को Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) का नया कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किया गया है। बताया गया है कि वहीदी पहले रक्षा और गृह मंत्री रह चुके हैं और पिछले छह महीनों से अंतरिम प्रमुख के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
हालांकि, इस नियुक्ति पर ईरानी अधिकारियों की ओर से अब तक औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि वरिष्ठ सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व पर हालिया हमलों के बाद कमांड स्ट्रक्चर में आई अस्थिरता के चलते यह फैसला लिया गया।
IRGC new commander in chief : IRGC की भूमिका और जवाबी कार्रवाई
IRGC को इस्लामिक रिपब्लिक की सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाने वाली एलीट फोर्स माना जाता है। यह तेहरान की सुरक्षा रणनीति और विदेशों में ऑपरेशनों का अहम हिस्सा है।
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, IRGC ने अमेरिका और इजरायल की बमबारी के जवाब में हमलों का “छठा राउंड” शुरू करने का दावा किया है। संगठन ने “बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन” हमलों के जरिए कई अमेरिकी ठिकानों और इजरायली सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही है।
रिपोर्ट्स में 27 अमेरिकी बेस, तेल अवीव स्थित तेल नोफ एयरबेस और हाकिर्या कमांड हेडक्वार्टर जैसे अहम ठिकानों का जिक्र किया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
मिनाब स्कूल पर हमले की खबर
Al Jazeera की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में लड़कियों के एक प्राथमिक विद्यालय पर कथित हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 148 बताई जा रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह हमला शनिवार को हुआ।
हालांकि, सैटेलाइट इमेज के हवाले से यह भी कहा गया कि स्कूल और पूर्व सैन्य बेस कम से कम 2016 से अलग-अलग स्थानों पर संचालित हो रहे थे। इन दावों की भी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है।
IRGC new commander in chief : क्षेत्र में बढ़ता खतरा
लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाइयों के बीच मध्य-पूर्व में बड़े संघर्ष की आशंका गहराती जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सैन्य कार्रवाई का दायरा बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक सुरक्षा, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर व्यापक रूप से पड़ सकता है।
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