
चंडीगढ़, 8 जून 2026 (वीकैंड रिपोर्ट)- Punjab Bus Strike Punjab Bus Strike : पंजाब में सरकारी बसों में सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। पनबस-पीआरटीसी ठेका कर्मचारी यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान कर दिया है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का जल्द समाधान नहीं किया गया और जेल में बंद कर्मचारियों को रिहा नहीं किया गया, तो 22, 23 और 24 जून को राज्यभर में सरकारी बसों का चक्का जाम किया जाएगा। यूनियन नेताओं के अनुसार आंदोलन की शुरुआत 10 जून से होगी। इस दौरान पंजाब के विभिन्न बस डिपो में रैलियां, रोष प्रदर्शन और विरोध सभाएं आयोजित की जाएंगी। यूनियन का कहना है कि सरकार लगातार उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है, जिसके चलते कर्मचारियों में भारी रोष है।
प्रदेश प्रधान रेशम सिंह गिल ने आरोप लगाया कि पिछले चार वर्षों में सरकार ने परिवहन विभाग के लिए कोई नई सरकारी बस नहीं खरीदी। उन्होंने कहा कि विभाग को मजबूत करने के बजाय निजी बसों और निजी ऑपरेटरों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे सरकारी परिवहन व्यवस्था कमजोर होती जा रही है। उनका आरोप है कि यह नीति सरकारी परिवहन विभाग को धीरे-धीरे निजीकरण की ओर धकेल रही है। यूनियन नेताओं ने यह भी दावा किया कि कर्मचारियों और यूनियन पदाधिकारियों की आवाज दबाने के लिए उनके खिलाफ मामले दर्ज किए जा रहे हैं और कई कर्मचारियों को जेल भेजा गया है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया और कहा कि कर्मचारियों को न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।
Punjab Bus Strike : प्रदेश महासचिव शमशेर सिंह ढिल्लों ने कहा कि “समान काम के लिए समान वेतन” जैसी मांगें लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को नियमित करने और वेतन संबंधी समस्याओं का समाधान करने के बजाय प्रशासन टालमटोल की नीति अपना रहा है।
सीनियर उपप्रधान हरकेश विक्की ने आरोप लगाया कि कई सरकारी बसें डिपो में खड़ी रहती हैं, जबकि निजी किलोमीटर स्कीम के तहत चलने वाली बसों को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंच रहा है और कर्मचारियों के भविष्य पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। यूनियन ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने समय रहते उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो 22 से 24 जून तक राज्यभर में व्यापक हड़ताल और धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री के आवास के बाहर भी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। यूनियन नेताओं का कहना है कि किसी भी प्रकार की असुविधा के लिए सरकार और परिवहन विभाग का प्रबंधन जिम्मेदार होगा।
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