

चंडीगढ़ (वीकैंड रिपोर्ट)- SAD-BJP Alliance Punjab : पंजाब की राजनीति में एक बार फिर शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के रिश्तों को लेकर चर्चाएं जोर पकड़ने लगी हैं। अकाली दल द्वारा महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावित विधेयक का समर्थन करने के ऐलान के बाद राजनीतिक गलियारों में दोनों दलों के फिर से करीब आने की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई है। इन अटकलों को उस समय और बल मिला, जब शुक्रवार को अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। हालांकि, बैठक में किन विषयों पर चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
2020 में टूटा था दशकों पुराना गठबंधन
शिरोमणि अकाली दल और भाजपा का गठबंधन पंजाब की राजनीति में लंबे समय तक प्रभावशाली रहा। दोनों दलों ने मिलकर 1997, 2007 और 2012 में राज्य में सरकार बनाई थी। लेकिन वर्ष 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर मतभेद बढ़ने के बाद अकाली दल ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से अलग होने का फैसला किया था।
क्या फिर साथ आएंगे दोनों दल?
पंजाब में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच अकाली दल और भाजपा की बढ़ती नजदीकियों को भविष्य के संभावित गठबंधन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, दोनों दलों की ओर से अब तक किसी नए गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों दल फिर एक मंच पर आते हैं, तो आगामी विधानसभा चुनावों में इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है।
SAD-BJP Alliance Punjab : सीमित संख्या, लेकिन प्रभाव बरकरार
वर्तमान में लोकसभा में अकाली दल के पास केवल एक सांसद है, लेकिन पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों और सिख समुदाय में पार्टी का प्रभाव अब भी महत्वपूर्ण माना जाता है। वहीं भाजपा का आधार मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों में मजबूत रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों दलों के पारंपरिक वोट बैंक का मेल पंजाब की राजनीति में नया समीकरण पैदा कर सकता है।
2027 चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल
पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। ऐसे में सुखबीर सिंह बादल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात, साथ ही संसद में कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर अकाली दल के समर्थन को राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। फिलहाल गठबंधन को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन आने वाले समय में दोनों दलों के रिश्तों की दिशा पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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