

जालंधर (ब्यूरो) : हमारे शहर में बहुत अच्छी मुहिम चल रही है और इस मुहिम की जितनी प्रशंसा की जाए उतना ही कम है। इस मुहिम का सबसे बड़ा फायदा उन पत्रकारों को होगा जोकि फर्जी पत्रकारों की गलतियों के कारण कई स्थानों पर खामियाजे का शिकार होते हैं। अब सवाल ये है कि जालंधर में फर्जी पत्रकार आए कहां से? क्या स्पेशल 26 फिल्म की तरह इनका कोई दोस्तों का टोला है? या फिर इनको प्रैस के कार्ड का शौक है? या फिर किसी प्रधान साहिब की मेहर इन पर हुई है? चलिए जो भी है खबरनवीस को क्या, खबरनवीस ने तो शहर में जो घट रहा है उसके बारे में आपको सूचित करना है तो वो कर दिया। बाकी हम यही कहेंगे कि मोटरसाइकिलों पर स्टिकर हटाने से सिर्फ अंकुश लगेगा जबकि इन स्टिकरों को कथित रूप से मीडिया की जिन काली भेड़ों ने लगवाया है उनका खुलासा भी होना जरूरी है। दरअसल कुछ काली भेड़ें सिर्फ दोस्ती और सिर्फ सलाम ठोंकने की प्रवृत्ति के कारण ऐसे फर्जी पत्रकारों के जन्म का कारण बन जाती हैं।]]>
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