

जालंधर (वीकैंड रिपोर्ट)- Nirmal Sampradaya Knowledge Heritage Seminar : निर्मल संप्रदाय के इतिहास, उद्भव, विद्वत परंपरा और पंजाब की ज्ञान-विरासत में उसके महत्वपूर्ण योगदान को सामने लाने के उद्देश्य से डिजिटल मीडिया एसोसिएशन और विरसा विहार, जालंधर के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष सेमिनार आयोजित किया गया। ‘निर्मल संप्रदाय: इतिहास, उत्पत्ति और ज्ञान-परंपरा’ विषय पर आयोजित इस विद्वत संवाद में संप्रदाय के ऐतिहासिक, साहित्यिक, धार्मिक और बौद्धिक पहलुओं पर गहन चर्चा हुई।
निर्मल परंपरा पंजाब की ज्ञान-विरासत का अहम हिस्सा
सेमिनार के मुख्य वक्ता प्रसिद्ध विद्वान डॉ. परमजीत सिंह मानसा ने कहा कि निर्मल परंपरा को केवल धार्मिक संप्रदाय के रूप में नहीं, बल्कि पंजाब की व्यापक ज्ञान, साहित्य, दर्शन और शिक्षा परंपरा के महत्वपूर्ण अंग के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि निर्मल विद्वानों की रचनाएं, अध्ययन और विद्या केंद्र पंजाब के बौद्धिक इतिहास को समझने के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।

नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ना समय की जरूरत
मुख्य अतिथि संत तेजा सिंह जी एम.ए., खुड्डा वाले ने कहा कि निर्मल विद्वानों ने गुरमत के साथ-साथ संस्कृत, वेदांत, ब्रज और पंजाबी साहित्य के अध्ययन व प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि इस समृद्ध विरासत के अनेक पहलुओं पर अभी और शोध किए जाने की आवश्यकता है तथा युवा पीढ़ी को इस ज्ञान-परंपरा से जोड़ने के लिए ऐसे आयोजन बेहद जरूरी हैं।
इतिहास को सहेजना सामूहिक जिम्मेदारी
निर्मल आश्रम, अर्जुन नगर के संत बाबा गुरिंदर पाल सिंह जी ने कहा कि अपने इतिहास और ज्ञान-विरासत को जानना केवल अतीत को याद करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी पहचान और बौद्धिक धरोहर को सुरक्षित रखना भी है।

प्राचीन ग्रंथों और पांडुलिपियों पर शोध की मांग
वक्ताओं ने निर्मल संप्रदाय से जुड़े प्राचीन ग्रंथों, हस्तलिखित पांडुलिपियों, टीकाओं और ऐतिहासिक दस्तावेजों के वैज्ञानिक संरक्षण और डिजिटल आर्काइव तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि यह पंजाब के बौद्धिक इतिहास का महत्वपूर्ण लेकिन अपेक्षाकृत उपेक्षित पक्ष है, जिस पर योजनाबद्ध शोध और दस्तावेजीकरण की जरूरत है।
Nirmal Sampradaya Knowledge Heritage Seminar : विद्वानों और सामाजिक हस्तियों की रही सहभागिता
कार्यक्रम में डिजिटल मीडिया एसोसिएशन के प्रधान अमन बग्गा, चेयरमैन अजीत सिंह बुलंद, पैट्रन प्रदीप कुमार वर्मा, महासचिव जसविंदर सिंह आजाद, पीआरओ धर्मिंदर सोंधी, सचिव केवल कृष्ण, संयुक्त सचिव जतिन बब्बर, कोषाध्यक्ष वरुण गुप्ता, विरसा विहार के वाइस चेयरमैन संगत राम, सचिव गुरमीत सिंह, डॉ. वनीत शर्मा, कंकेश गुप्ता, हरसेवक सिंह भुल्लर, एस.पी. सिंह सहित कई विद्वानों, साहित्यकारों और सामाजिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया।

‘केसरी विरासत’ करेगा संवाद का विस्तार
कार्यक्रम के दौरान गुरप्रीत सिंह संधू, संपादक केसरी विरासत, ने कहा कि निर्मल विद्वानों के साथ पॉडकास्ट और विचार-संवाद की श्रृंखला पहले से जारी है। इस सेमिनार का उद्देश्य इस चर्चा को व्यापक मंच प्रदान करना और निर्मल परंपरा की साहित्यिक एवं ज्ञानात्मक विरासत को युवा पीढ़ी तक पहुंचाना है।
निर्मल संतों पर आधारित विशेष गीत हुआ रिलीज
सेमिनार के दौरान निर्मल संतों की विद्वता, तपस्या और समाज सेवा को समर्पित विशेष गीत ‘विरासत डिवाइन’ चैनल पर रिलीज किया गया। इस गीत के माध्यम से निर्मल संतों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. परमजीत सिंह मानसा और संत तेजा सिंह जी एम.ए. को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। सेमिनार में यह संदेश दिया गया कि निर्मल संप्रदाय की ज्ञान-परंपरा पर शोध, दस्तावेजीकरण और संवाद की प्रक्रिया को और मजबूत किया जाना चाहिए ताकि यह अमूल्य विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंच सके।

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