
विज्ञान डेस्क, 23 अप्रैल 2026 Why Space Is Black : अंतरिक्ष काला क्यों दिखाई देता है? यह सवाल लंबे समय से वैज्ञानिकों और आम लोगों की जिज्ञासा का विषय रहा है। आधुनिक विज्ञान ने अब इस रहस्य को काफी हद तक समझ लिया है। सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि पृथ्वी पर दिन के समय आकाश नीला क्यों दिखाई देता है। सूर्य से आने वाली रोशनी जब Earth के वायुमंडल में प्रवेश करती है, तो वहां मौजूद गैसों और सूक्ष्म कणों से टकराकर अलग-अलग दिशाओं में बिखर जाती है। इस प्रक्रिया को Rayleigh scattering कहा जाता है।
नीली रोशनी की तरंगदैर्ध्य कम होने की वजह से उसका बिखराव ज्यादा होता है, इसलिए हमें दिन में आकाश नीला नजर आता है। रात के समय जब Earth का हिस्सा सूर्य की सीधी रोशनी से दूर हो जाता है, तो प्रकाश का बिखराव नहीं हो पाता और आकाश काला दिखाई देता है। अगर कोई व्यक्ति Moon जैसी जगह पर जाए, जहां वायुमंडल नहीं है, तो वहां दिन में भी आकाश काला ही नजर आएगा क्योंकि प्रकाश को बिखेरने के लिए कोई माध्यम मौजूद नहीं होता।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब ब्रह्मांड में Sun और असंख्य तारे मौजूद हैं, तो पूरा अंतरिक्ष रोशन क्यों नहीं होता? इसी सवाल को विज्ञान में Olbers’ paradox कहा जाता है। यदि ब्रह्मांड अनंत होता और हमेशा से अस्तित्व में होता, तो हर दिशा में हमें तारे दिखाई देते और रात का आकाश चमकदार होना चाहिए था।
Why Space Is Black : वैज्ञानिकों के अनुसार इसका जवाब ब्रह्मांड की उम्र और उसके लगातार फैलने में छिपा है। माना जाता है कि ब्रह्मांड लगभग 13 से 15 अरब वर्ष पुराना है। इसका मतलब है कि हम केवल उतनी ही दूरी तक देख सकते हैं, जितनी दूर तक प्रकाश अब तक यात्रा कर पाया है।इसके अलावा ब्रह्मांड लगातार विस्तार कर रहा है। जब दूर स्थित Galaxy हमसे दूर जाती हैं, तो उनके प्रकाश की तरंगदैर्ध्य बढ़ जाती है। इसे Doppler effect और रेडशिफ्ट प्रभाव कहा जाता है। इससे प्रकाश कमजोर होकर हमारी आंखों से दिखाई नहीं देता। हालांकि अंतरिक्ष पूरी तरह से अंधकारमय नहीं है। दूर स्थित तारों और आकाशगंगाओं की हल्की रोशनी वहां एक बेहद मंद चमक पैदा करती है, लेकिन Earth के वायुमंडल से बाहर यह अंधकार और भी गहरा महसूस होता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि आकाश का रंग वायुमंडल की संरचना पर भी निर्भर करता है। यदि किसी ग्रह का वायुमंडल हाइड्रोजन से भरपूर हो, तो नीली रोशनी ज्यादा बिखरेगी, जबकि घने बादलों वाले वातावरण में सभी रंग लगभग समान रूप से बिखर सकते हैं।
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