

धर्म डेस्क (वीकैंड रिपोर्ट)- Kamika Ekadashi 2026 : हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को अत्यंत पुण्यदायी और कल्याणकारी माना गया है। विशेष रूप से सावन मास में आने वाली कामिका एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस वर्ष कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। पद्म पुराण, स्कंद पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण और भविष्योत्तर पुराण में इस व्रत की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, केवल भोजन का त्याग कर लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इस दिन आचरण, विचार और व्यवहार की शुद्धता भी आवश्यक है। शास्त्रों में कुछ ऐसे कार्य बताए गए हैं जिनसे एकादशी व्रत का पुण्य फल कम हो सकता है।
Kamika Ekadashi 2026 : कामिका एकादशी पर इन गलतियों से बचें
1. क्रोध और विवाद से रहें दूर
स्कंद पुराण के अनुसार, क्रोध मन की शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा को नष्ट कर देता है। एकादशी के दिन झगड़ा या विवाद करने से व्रत का शुभ प्रभाव कम हो सकता है।
2. झूठ और छल-कपट न करें
धर्मशास्त्रों में सत्य को सर्वोच्च धर्म माना गया है। इस दिन असत्य बोलना, किसी को धोखा देना या कपटपूर्ण व्यवहार करना व्रत की भावना के विपरीत माना जाता है।
3. चुगली और निंदा से बचें
ब्रह्मवैवर्त पुराण में दूसरों की निंदा, अपशब्द और चुगली से दूर रहने का निर्देश दिया गया है। ऐसा करने से व्रत का पुण्य घट सकता है।
4. हिंसा और क्रूरता न करें
किसी भी जीव को कष्ट पहुंचाना इस दिन विशेष रूप से वर्जित माना गया है। दया, करुणा और सेवा भाव को अपनाना शुभ माना जाता है।
5. इंद्रिय भोग और वासनाओं से दूर रहें
एकादशी आत्मसंयम और आत्मशुद्धि का पर्व है। इसलिए काम, लोभ और भौतिक सुखों में अत्यधिक लिप्त रहने से बचना चाहिए।
6. आलस्य और अधिक निद्रा से बचें
भविष्योत्तर पुराण के अनुसार, इस दिन जप, तप, भजन, विष्णु सहस्रनाम का पाठ, गीता अध्ययन और सत्संग करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
7. भगवान विष्णु की पूजा की उपेक्षा न करें
केवल उपवास करना ही पर्याप्त नहीं माना गया है। भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप और कथा श्रवण के बिना व्रत अधूरा माना जाता है।
8. द्वादशी पारण में लापरवाही न करें
शास्त्रों के अनुसार, व्रत का पारण सही समय और विधि से करना आवश्यक है। समय पर पारण न करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
Kamika Ekadashi 2026 : कामिका एकादशी का धार्मिक महत्व
पुराणों में वर्णन मिलता है कि देवर्षि नारद के प्रश्न पर ब्रह्माजी ने एकादशी व्रत की महिमा का वर्णन करते हुए कहा था कि इसका पुण्य कई बड़े यज्ञों से भी अधिक माना गया है। भगवान विष्णु ने भी कहा है कि जो व्यक्ति श्रद्धा, नियम और भक्ति के साथ इस व्रत का पालन करता है, उसे विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और उसके जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
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