
वॉशिंगटन, 4 जून 2026 (वीकैंड रिपोर्ट)- US House Iran War Resolution : ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) ने एक द्विदलीय ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन’ पारित किया है, जिसका उद्देश्य ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई को समाप्त करना है। यह प्रस्ताव बेहद करीबी मुकाबले में 215-208 मतों से पारित हुआ।
यह प्रस्ताव हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के वरिष्ठ डेमोक्रेट सदस्य ग्रेगरी मीक्स द्वारा पेश किया गया था। इसे एडम स्मिथ और जिम हाइम्स सहित कई वरिष्ठ डेमोक्रेट नेताओं का समर्थन प्राप्त हुआ। प्रस्ताव के पारित होने के बाद अमेरिकी राजनीति में ईरान नीति को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
ग्रेगरी मीक्स ने इसे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मोड़ बताते हुए कहा कि यह वोट राष्ट्रपति ट्रंप की ईरान नीति के खिलाफ बढ़ते द्विदलीय विरोध का संकेत है। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव एक ऐसे युद्ध को समाप्त करने की दिशा में पहला कदम है, जिसे कई सांसद अवैध और अत्यधिक महंगा मानते हैं।
US House Iran War Resolution : हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के वरिष्ठ सदस्य एडम स्मिथ ने कहा कि प्रतिनिधि सभा का यह फैसला स्पष्ट संदेश देता है कि प्रशासन को ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य रणनीति पर पुनर्विचार करना चाहिए। उनके अनुसार, सरकार अपने घोषित उद्देश्यों को हासिल करने में सफल नहीं रही है, जिनमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना शामिल था।
विपक्षी सांसदों का आरोप है कि इस संघर्ष के कारण आर्थिक और मानवीय लागत लगातार बढ़ी है, जबकि अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं हुए। आलोचकों का मानना है कि युद्ध ने क्षेत्रीय तनाव को कम करने के बजाय और अधिक जटिल बना दिया है तथा कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं को भी प्रभावित किया है।
प्रतिनिधि प्रमिला जयपाल ने भी प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि यदि वह मतदान के समय वाशिंगटन में मौजूद होतीं तो इसके पक्ष में वोट देतीं। उन्होंने कहा कि युद्ध घोषित करने का संवैधानिक अधिकार केवल कांग्रेस के पास है और किसी भी सैन्य कार्रवाई को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
US House Iran War Resolution : जयपाल ने कहा कि इस संघर्ष का असर केवल सैन्य स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे आम नागरिकों, सैनिकों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ा है। उन्होंने इसे संवैधानिक और मानवीय दृष्टि से गंभीर मुद्दा बताया। विश्लेषकों का मानना है कि प्रतिनिधि सभा में प्रस्ताव पारित होना ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है। हालांकि प्रस्ताव को प्रभावी बनने के लिए अब अमेरिकी सीनेट में भी समर्थन हासिल करना होगा। आने वाले दिनों में सीनेट की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
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