

नई दिल्ली (वीकैंड रिपोर्ट)- Ravneet Singh Bittu Resigns as Union Minister : केंद्र सरकार में रेल राज्य मंत्री रहे रवनीत सिंह बिट्टू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक सूचना में बताया गया कि इस्तीफा मंजूर होते ही यह तत्काल प्रभाव से लागू हो गया।
रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो गया था। 18 जून को हुए राज्यसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया। इसके बावजूद वे अब तक केंद्रीय मंत्रिपरिषद में बने हुए थे। शुक्रवार को राष्ट्रपति द्वारा उनका इस्तीफा स्वीकार किए जाने के साथ ही उनका मंत्री पद समाप्त हो गया। लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल द्वारा राज्यसभा सीट छोड़ने के बाद राजस्थान से रिक्त हुई सीट पर रवनीत सिंह बिट्टू को शेष कार्यकाल के लिए राज्यसभा भेजा गया था।
इस्तीफे के बाद क्या बोले बिट्टू?
इस्तीफा स्वीकार होने के बाद रवनीत सिंह बिट्टू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें भारत सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में देश की सेवा करने का अवसर मिला, जो उनके लिए गर्व और सम्मान की बात रही। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से पंजाब की जनता की सेवा करना उनके जीवन का महत्वपूर्ण अनुभव रहा है और वे आगे भी राष्ट्रहित, जनसेवा तथा विकसित भारत के संकल्प के लिए पूरी निष्ठा के साथ कार्य करते रहेंगे।
Ravneet Singh Bittu Resigns as Union Minister : कौन हैं रवनीत सिंह बिट्टू?
रवनीत सिंह बिट्टू 24 मार्च 2024 को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे। इससे पहले वे लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़े रहे और लोकसभा में पार्टी के महत्वपूर्ण नेताओं में शामिल थे। वे वर्ष 2009 में आनंदपुर साहिब तथा 2014 और 2019 में लुधियाना लोकसभा सीट से सांसद चुने गए।
वे पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में उन्हें केंद्रीय रेल राज्य मंत्री बनाया गया था। वर्ष 2021 में किसान आंदोलन के दौरान सिंघू बॉर्डर पर ‘जन संसद’ कार्यक्रम में उन पर हमला भी हुआ था। उसी वर्ष कांग्रेस नेतृत्व की अनुपस्थिति के दौरान उन्हें कुछ समय के लिए लोकसभा में कांग्रेस का नेता भी नियुक्त किया गया था।
रवनीत सिंह बिट्टू का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो चुका था और पार्टी ने उन्हें दोबारा उच्च सदन के लिए उम्मीदवार नहीं बनाया था। अब राजनीतिक गलियारों में उनके अगले राजनीतिक दायित्व को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
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