
नई दिल्ली, 20 मई 2026 (वीकैंड रिपोर्ट)- Supreme Court Dog Order : देशभर में बढ़ते आवारा कुत्तों के हमलों और लोगों की सुरक्षा से जुड़े मामलों पर सुनवाई करते हुए Supreme Court of India ने मंगलवार को बड़ा और सख्त फैसला सुनाया। अदालत ने डॉग लवर्स और पशु अधिकार संगठनों द्वारा दाखिल सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए नवंबर 2025 में दिए गए अपने आदेश में किसी भी तरह का बदलाव करने से साफ इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा कि अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश जारी रहेगा, क्योंकि अब यह मामला सिर्फ पशु अधिकारों तक सीमित नहीं बल्कि सीधे तौर पर सार्वजनिक सुरक्षा और लोगों की जान से जुड़ा मुद्दा बन चुका है।
“कड़वी सच्चाई से आंखें नहीं मूंद सकते”
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि देशभर में आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं और अब यह बेहद गंभीर स्थिति बन चुकी है। कोर्ट ने कहा कि छोटे बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों पर कुत्तों के हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। कई मामलों में बच्चों को कुत्तों ने बुरी तरह नोच डाला, जबकि बुजुर्ग और विदेशी पर्यटक भी इन हमलों का शिकार हुए।
बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि “कड़वी सच्चाइयों से आंखें नहीं मूंदी जा सकतीं।” अदालत ने कहा कि पहले भी निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर उन्हें सही तरीके से लागू नहीं किया गया।
Supreme Court Dog Order : “Survival of the Fittest” जैसी स्थिति
सुप्रीम कोर्ट ने बेहद तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि मौजूदा हालात ऐसे हैं जैसे जमीन पर डार्विन का सिद्धांत “Survival of the Fittest” लागू हो गया हो।
अदालत ने कहा कि समाज के कमजोर वर्ग — खासकर बच्चे और बुजुर्ग — खुद को बचाने के लिए अकेले छोड़ दिए गए हैं, क्योंकि प्रभावी सरकारी कार्रवाई की कमी साफ दिखाई देती है।
कोर्ट ने जोर देकर कहा कि किसी भी सभ्य समाज में नागरिकों को डर और हमले के खतरे के बीच जीने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
अनुच्छेद 21 का हवाला
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में संविधान के अनुच्छेद 21 का भी हवाला दिया। अदालत ने कहा कि जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार में यह भी शामिल है कि हर नागरिक बिना डर, हमले और कुत्तों के काटने जैसी घटनाओं के खतरे के सार्वजनिक स्थानों पर स्वतंत्र रूप से घूम सके।
बेंच ने कहा कि राज्य सरकारें और स्थानीय प्रशासन मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकते, जबकि इंसानी जीवन के लिए ऐसे खतरे लगातार बढ़ रहे हैं जिन्हें रोका जा सकता है।
नवंबर 2025 में क्या आदेश दिए गए थे?
गौरतलब है कि नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि अस्पतालों, पार्कों, रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर होम में भेजा जाए।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि नसबंदी के बाद इन कुत्तों को वापस उसी इलाके में नहीं छोड़ा जाएगा, जहां से उन्हें पकड़ा गया था।
इसके अलावा कोर्ट ने सार्वजनिक जगहों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर भी रोक लगाई थी। हालांकि तय और निर्धारित स्थानों पर भोजन देने की अनुमति दी गई थी।
Supreme Court Dog Order : डॉग लवर्स और NGO ने दी थी चुनौती
सुप्रीम कोर्ट के इन आदेशों के खिलाफ कई डॉग लवर्स, पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और एनजीओ ने याचिकाएं दायर की थीं। उनका तर्क था कि यह फैसला पशु अधिकारों के खिलाफ है और इससे कुत्तों के साथ अमानवीय व्यवहार हो सकता है।
हालांकि अदालत ने सभी दलीलों को सुनने के बाद स्पष्ट कर दिया कि मानव जीवन और सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
स्वत: संज्ञान लेकर शुरू हुई थी सुनवाई
यह पूरा मामला पिछले साल तब सुर्खियों में आया था, जब देश के कई हिस्सों में आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाएं तेजी से बढ़ीं। इसके बाद 28 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू की थी।
लंबी सुनवाई और सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब लागू रखने का आदेश दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला देशभर में आवारा कुत्तों को लेकर चल रही बहस पर बड़ा असर डाल सकता है और अब राज्य सरकारों तथा नगर निकायों पर इसे सख्ती से लागू करने का दबाव बढ़ेगा।
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