
नई दिल्ली/इस्लामाबाद, 1 मई 2026 (वीकैंड रिपोर्ट)- Global Oil Price Surge : ईरान से जुड़े तनाव के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जिससे दुनिया भर में ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है। इसी बीच पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री Ali Pervaiz Malik ने भारत और पाकिस्तान की स्थिति की तुलना करते हुए दोनों देशों के बीच बड़ा अंतर उजागर किया है।
मलिक के मुताबिक, मजबूत रणनीतिक तेल भंडार और बड़े विदेशी मुद्रा भंडार के चलते भारत इस संकट का सामना अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से कर पा रहा है। India ने विभिन्न स्रोतों से कच्चे तेल की खरीद और अपने रिजर्व का इस्तेमाल कर आपूर्ति बाधाओं के असर को कम करने की कोशिश की है, खासकर Strait of Hormuz में संभावित व्यवधान के बावजूद।
उन्होंने बताया कि भारत के पास लगभग 60 से 70 दिनों का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार उपलब्ध है, जिसे जरूरत पड़ने पर तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा भारत के पास करीब 600 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार भी है, जो संकट के समय आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है।
Global Oil Price Surge : वहीं दूसरी ओर Pakistan की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर बताई गई है। मलिक के अनुसार, पाकिस्तान के पास रणनीतिक तेल भंडार नहीं हैं और वह मुख्य रूप से वाणिज्यिक स्टॉक पर निर्भर है। यह स्टॉक केवल 5 से 7 दिनों तक कच्चे तेल की जरूरत पूरी कर सकता है, जबकि परिष्कृत ईंधन का भंडार करीब 20 से 21 दिनों तक ही पर्याप्त है।
उन्होंने पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति के लिए International Monetary Fund (IMF) के साथ हुए समझौतों की शर्तों को भी जिम्मेदार ठहराया। सरकार ने वित्तीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए पेट्रोल और डीजल पर कर लगाने का फैसला किया था, जिससे आम लोगों पर बोझ बढ़ा है।
तेल कीमतों में उछाल के बीच पाकिस्तान को राहत के उपायों के लिए IMF से बातचीत करनी पड़ी। सरकार ने डीजल पर टैक्स घटाकर शून्य करने और उसका बोझ पेट्रोल पर डालने का फैसला लिया है। साथ ही मोटरसाइकिल चालकों के लिए लक्षित सब्सिडी योजना पर भी काम किया जा रहा है।
Global Oil Price Surge : मलिक ने यह भी दावा किया कि IMF के साथ बातचीत के बाद पेट्रोलियम करों में प्रति लीटर 80 रुपये तक की राहत पर सहमति बनी है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि यदि पाकिस्तान IMF की शर्तों से पीछे हटता, तो आर्थिक संकट और गहरा सकता था। कुल मिलाकर, मौजूदा वैश्विक तेल संकट ने भारत और पाकिस्तान की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक मजबूती और नीति रणनीतियों के बीच स्पष्ट अंतर को उजागर कर दिया है।
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