
वॉशिंगटन, 13 मार्च 2026 (वीकैंड रिपोर्ट)- Middle East War : पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है। पिछले दो हफ्तों से चल रहे संघर्ष के बीच ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला हुआ तो वह पूरे क्षेत्र के तेल और गैस ढांचे को निशाना बना सकता है। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में हलचल तेज हो गई है और आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है।
इसी बीच अमेरिका ने अचानक रुख बदलते हुए कुछ देशों को रूसी तेल खरीदने की अस्थायी अनुमति देने का फैसला किया है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय की ओर से जारी नोटिस के मुताबिक 12 मार्च को सुबह 12:01 बजे या उससे पहले जहाजों पर लदे रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों से जुड़े लेनदेन की अनुमति दी गई है। यह छूट 11 अप्रैल तक प्रभावी रहेगी।
युद्ध से बढ़ी वैश्विक ऊर्जा चिंता
पिछले 14 दिनों से अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए जा रहे हमलों और इसके जवाब में ईरान की सैन्य कार्रवाई के कारण पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस संघर्ष का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।
Middle East War : ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने की कोशिश
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने कहा है कि यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने और तेल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है। साथ ही यह भी संकेत दिया गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष फिलहाल जल्द खत्म होने की संभावना कम है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है।
भारत को पहले ही मिल चुकी है छूट
गौरतलब है कि इससे पहले अमेरिका भारत को भी रूसी तेल खरीदने की विशेष अनुमति दे चुका है। 5 मार्च को अमेरिका ने भारत को 30 दिनों की छूट दी थी, जिसके तहत भारत रूस से तेल आयात कर सकता है।
अमेरिकी प्रशासन के अनुसार यह फैसला अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आपूर्ति बनाए रखने और कीमतों पर दबाव कम करने के उद्देश्य से लिया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के चलते आने वाले समय में वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है।
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