
नई दिल्ली (वीकैंड रिपोर्ट) Mandir parikrama rules : पूजा-पाठ में परिक्रमा करना सनातन परंपरा का एक अहम हिस्सा है। शास्त्रों में माना गया है कि परिक्रमा से पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मंदिर की परिक्रमा हमेशा दाहिने हाथ की ओर से करनी चाहिए, क्योंकि इससे शरीर को मूर्ति से निकलने वाली सकारात्मक ऊर्जा का लाभ मिलता है।
विज्ञान की दृष्टि से भी परिक्रमा का विशेष महत्व है। यह न सिर्फ शारीरिक ऊर्जा को बढ़ाती है बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करती है। दाहिने को ही दक्षिण कहा जाता है और इसी कारण इसे प्रदक्षिणा कहा जाता है।
Mandir parikrama rules : विभिन्न देवताओं और स्थानों की परिक्रमा की मान्यताएँ
सूर्य देव – 7 प्रदक्षिणा
श्री गणेश – 4 प्रदक्षिणा
भगवान विष्णु और उनके सभी अवतार – 4 प्रदक्षिणा
भगवान श्रीकृष्ण – 4 प्रदक्षिणा
देवी दुर्गा – 1 प्रदक्षिणा
हनुमानजी – 3 प्रदक्षिणा
भगवान शिव – आधी प्रदक्षिणा (क्योंकि शिवलिंग की जलधारी को लांघना वर्जित माना गया है)
शनि देव – 7 प्रदक्षिणा (शनिवार के दिन विशेष फलदायी मानी जाती है)
पीपल का वृक्ष – 7 या 108 प्रदक्षिणा (सुबह या शनिवार को विशेष रूप से शुभ मानी जाती है)
माना जाता है कि परिक्रमा करते समय हर कदम पर जाने-अनजाने और जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और साधक को सद्बुद्धि प्राप्त होती है।
कुछ मंदिरों में मूर्ति की पीठ की ओर से परिक्रमा करने की जगह नहीं होती, ऐसे में मूर्ति के सामने ही गोल घूमकर परिक्रमा करना भी शास्त्र सम्मत माना गया है।
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Mandir parikrama rules : विभिन्न देवताओं और स्थानों की परिक्रमा की मान्यताएँ