





जालंधर (वीकैंड रिपोर्ट)- UPI Merchant Charge Protest : यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत व्यापारी शुल्क के विरोध में देशभर के व्यापारी संगठनों ने आंदोलन तेज कर दिया है। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के नेतृत्व में आयोजित एक राष्ट्रीय वर्चुअल बैठक में 22 राज्यों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और इस मुद्दे पर साझा रणनीति तैयार की।
बैठक की अध्यक्षता संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबू लाल गुप्ता और राष्ट्रीय महासचिव मुकंद मिश्रा ने की। पंजाब की ओर से पंजाब प्रदेश व्यापार मंडल के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्यारे लाल सेठ, महासचिव समीर जैन और भारतीय उद्योग व्यापार मंडल पंजाब इकाई के अध्यक्ष रंजन अग्रवाल शामिल हुए।
2 अक्टूबर को देशभर में मनाया जाएगा UPI शुल्क विरोध दिवस
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 2 अक्टूबर को पूरे देश में ‘UPI शुल्क विरोध दिवस’ मनाया जाएगा। इस दौरान व्यापारी संगठन अपने-अपने क्षेत्रों के सांसदों को ज्ञापन सौंपेंगे और प्रस्तावित शुल्क को वापस लेने की मांग करेंगे। इसके साथ ही बाजारों में ‘UPI पर शुल्क बंद करो’ और ‘0.4 प्रतिशत शुल्क स्वीकार नहीं’ जैसे संदेशों वाले बैनर और स्टिकर भी लगाए जाएंगे। 2 अक्टूबर के बाद देशभर से प्राप्त ज्ञापनों और व्यापारियों की प्रतिक्रियाओं को एकत्र कर केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाओं तक पहुंचाया जाएगा।
बाजार स्तर तक पहुंचेगा अभियान : रंजन अग्रवाल
भारतीय उद्योग व्यापार मंडल पंजाब इकाई के अध्यक्ष रंजन अग्रवाल ने कहा कि पंजाब में इस अभियान को बाजार स्तर तक ले जाया जाएगा और अधिक से अधिक व्यापारी संगठनों को इससे जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि व्यापारी वर्ग डिजिटल भुगतान प्रणाली का समर्थन करता है, लेकिन व्यापारियों पर अतिरिक्त लेनदेन शुल्क का बोझ डालना उचित नहीं है। छोटे और मध्यम व्यापारियों को पहले ही बैंक ब्याज, कर्मचारियों के वेतन, बिजली, किराया, परिवहन और टैक्स अनुपालन जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
UPI Merchant Charge Protest : छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ उचित नहीं : समीर जैन
महासचिव समीर जैन ने कहा कि यूपीआई व्यवस्था को मजबूत करने की लागत केवल छोटे व्यापारियों पर डालना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान प्रणाली से नकदी प्रबंधन, नोटों की छपाई और वितरण पर होने वाला खर्च भी कम होता है, इसलिए इसके व्यापक आर्थिक लाभों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि 75 हजार रुपये या उससे अधिक के पात्र लेनदेन पर अधिकतम 300 रुपये शुल्क की सीमा तय किए जाने के बावजूद, बार-बार होने वाले लेनदेन व्यापारियों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकते हैं।
डिजिटल भुगतान के विरोध में नहीं, अतिरिक्त शुल्क के खिलाफ हैं व्यापारी
प्यारे लाल सेठ ने स्पष्ट किया कि व्यापारी वर्ग यूपीआई और डिजिटल अर्थव्यवस्था का समर्थक है। उनका विरोध केवल अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने को लेकर है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि उनका उद्देश्य डिजिटल भुगतान को रोकना नहीं, बल्कि एक पारदर्शी, न्यायसंगत और टिकाऊ भुगतान व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
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