
नई दिल्ली, 11 जून 2026 (वीकैंड रिपोर्ट)- PM Ujjwala Yojana Rule Change : प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के करोड़ों लाभार्थियों के लिए बड़ा झटका देने वाली खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या में बड़ी कटौती कर दी है। नए नियमों के अनुसार अब लाभार्थियों को साल में केवल चार रिफिल पर ही सब्सिडी का लाभ मिलेगा, जबकि इससे पहले नौ सिलेंडरों तक सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही थी। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब हाल ही में तेल विपणन कंपनियों ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की है। सरकार के इस कदम का सीधा असर करोड़ों गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ सकता है, जो रसोई गैस के लिए उज्ज्वला योजना पर निर्भर हैं।
सरकार की नई व्यवस्था के तहत उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को पहले चार रिफिल पर प्रति सिलेंडर 300 रुपये की सब्सिडी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से उनके बैंक खातों में भेजी जाएगी। हालांकि प्रति सिलेंडर सब्सिडी की राशि में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार यह बदलाव लाभार्थियों की औसत वार्षिक खपत को ध्यान में रखते हुए किया गया है। मंत्रालय का दावा है कि उज्ज्वला परिवारों में औसतन चार एलपीजी सिलेंडरों की सालाना खपत दर्ज की गई है, इसलिए सब्सिडी को उसी आधार पर पुनर्गठित किया गया है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत मई 2016 में की गई थी। इस योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों की महिलाओं को धुएं से मुक्त स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना था। योजना के तहत अब तक देशभर में 10.5 करोड़ से अधिक मुफ्त एलपीजी कनेक्शन वितरित किए जा चुके हैं। सरकार ने मई 2022 में उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए प्रति सिलेंडर 200 रुपये की सब्सिडी शुरू की थी, जिसे बाद में अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 300 रुपये कर दिया गया। यह राशि प्रत्येक रिफिल के बाद सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में जमा की जाती है।
PM Ujjwala Yojana Rule Change : पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार सरकार अब तक एलपीजी सब्सिडी के रूप में लगभग 52,000 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। वहीं सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण घरेलू एलपीजी पर भारी वित्तीय दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार पहले जहां लाभार्थियों को नौ सिलेंडरों पर सब्सिडी मिलने से सालाना 2,700 रुपये तक की सहायता मिल जाती थी, वहीं अब यह लाभ घटकर अधिकतम 1,200 रुपये सालाना रह जाएगा। यानी प्रति परिवार सालाना सहायता में 1,500 रुपये तक की कमी आ सकती है।
सरकार का कहना है कि संशोधित सब्सिडी व्यवस्था से वित्तीय बोझ कम होगा और जरूरतमंद परिवारों को सहायता मिलती रहेगी। हालांकि विपक्षी दलों और उपभोक्ता संगठनों ने इस फैसले पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
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