





जालंधर (वीकेंड रिपोर्ट)- Maa Baglamukhi Dham Jalandhar : सिद्ध मां बगलामुखी धाम, गुलमोहर सिटी में आयोजित अलौकिक हवन यज्ञ के दौरान यज्ञ कुंड में प्रज्वलित पावन अग्नि, वैदिक मंत्रोच्चार और आहुतियों की सुगंध से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। इस पावन अवसर पर धाम के संस्थापक एवं व्यवस्थापक नवजीत भारद्वाज ने बुल्लेशाह जी की अमर वाणी के माध्यम से श्रद्धालुओं को अध्यात्म, प्रेम और आत्मज्ञान का संदेश दिया।
बुल्लेशाह जी फरमाते हैं—
उस दा मुख इक जोत है, घुंघट है संसार।
घुंघट में ओह छुप्प गया, मुख पर आंचल डार।।
उन को मुख दिखलाए हैं, जिन से उस की प्रीत।
उनको ही मिलता है वोह, जो उस के हैं मीत।।

इन पंक्तियों का भाव समझाते हुए नवजीत भारद्वाज ने कहा कि परमात्मा का वास्तविक स्वरूप ज्योति है, लेकिन संसार का मोह हमारे और उस ज्योति के बीच पर्दा बन जाता है। परमात्मा न तो हमसे दूर है और न ही उसने हमारे बीच कोई दीवार बनाई है। यह दीवार हमारे अहंकार, लालच, नफरत और ईर्ष्या से खड़ी होती है। जब मनुष्य हर समय दूसरों की कमियां खोजने में लगा रहता है, तो वह अपने भीतर मौजूद परमात्मा की ज्योति को पहचान नहीं पाता।

उन्होंने कहा कि सूर्य का प्रकाश अमीर-गरीब, जाति और धर्म का भेद नहीं करता। इसी तरह परमात्मा की कृपा भी हमें प्रेम और समानता की भावना अपनाने की प्रेरणा देती है। जिस परमात्मा की ज्योति हर प्राणी में देखने की शिक्षा संत देते हैं, उसके दरबार में किसी इंसान को छोटा समझने का कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
नवजीत भारद्वाज ने कहा कि संसार छोड़ देना अध्यात्म नहीं, बल्कि संसार में रहते हुए मोह और अहंकार से ऊपर उठना सच्ची साधना है। धन कमाना गलत नहीं, लेकिन धन का घमंड करना गलत है। परिवार से प्रेम करना जरूरी है, लेकिन उसके मोह में इंसानियत को भूल जाना उचित नहीं। उन्होंने कहा कि जेब में धन के साथ दिल में दया, जीवन में सफलता के साथ व्यवहार में विनम्रता और हर परिस्थिति में इंसानियत बनाए रखना ही घूंघट हटाने की शुरुआत है।

नवजीत भारद्वाज ने बुल्लेशाह जी की अगली पंक्तियां का अध्यात्मिक रहस्य को खोलते हुए कहा कि
उन को मुख दिखलाए हैं, जिन से उस की प्रीत।
उनको ही मिलता है वोह, जो उस के हैं मीत।।
इन पंक्तियों का अर्थ है कि सच्चे प्रेम, विनम्रता और समर्पण से भरा मन ही परमात्मा की उपस्थिति को गहराई से अनुभव कर सकता है। जिस प्रकार सही तरंग मिलने पर ही रेडियो की आवाज सुनाई देती है, उसी प्रकार मन को शांत करके नाम-सिमरन करने और शिकायतों से ऊपर उठने पर आत्मिक शांति का अनुभव होता है।
अंत में नवजीत भारद्वाज ने प्रभु भक्तों को संदेश दिया कि परमात्मा का सच्चा मीत बनने के लिए धार्मिक होने का दिखावा नहीं, बल्कि अपने कर्मों से दूसरों के जीवन में खुशियां बांटना जरूरी है। किसी जरूरतमंद की सहायता करना, दुखी को सहारा देना और सभी के प्रति प्रेम रखना ही सच्ची भक्ति है। उन्होंने कहा कि परमात्मा को पाने के लिए दुनिया नहीं, पहले अपने मन को बदलना होगा, क्योंकि प्रेम ही वह मार्ग है जो मनुष्य को अपने भीतर की दिव्य ज्योति से जोड़ता है।

इस अवसर पर कंठ जज, श्वेता भारद्वाज, निर्मल शर्मा, मनमोहन भट्टी,राकेश प्रभाकर,पूनम प्रभाकर, हरिंदर सिंह ढींढसा,सरोज बाला, समीर कपूर,अमरेंद्र कुमार शर्मा,मनदीप सिंह,जानू थापर, ऋषभ कालिया,रिंकू सैनी,अमरजीत सिंह, उदय ,अजीत कुमार , नरेंद्र ,राकेश शर्मा, प्रदीप, सुधीर, सुमीत,मनीष शर्मा,मंदीप सिंह,डॉ गुप्ता,अमनदीप,रितु, सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू, गुलशन शर्मा,संजीव शर्मा,मुकेश, रजेश महाजन ,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा, ऐडवोकेट शर्मा,वरुण, नितिश,रोमी, भोला शर्मा,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल , अश्विनी शर्मा , रवि भल्ला, भोला शर्मा, जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दसोंधा सिंह, प्रिंस कुमार, पप्पू ठाकुर, नरेंद्र, सौरभ,दीपक कुमार, नरेश,दिक्षित, अनिल, कमल नैयर, अजय सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे। हवन यज्ञ उपरांत विशाल लंगर भंडारे का आयोजन किया गया।
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