
एस्ट्रो डेस्क (वीकैंड रिपोर्ट)- Vastu Tips : शहरों में बालकनी, छत और आंगन में कबूतरों का आना आम बात है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि सनातन परंपरा, वास्तु शास्त्र और प्राचीन ग्रंथों में इसे किस दृष्टि से देखा गया है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पक्षियों की गतिविधियों का संबंध घर की ऊर्जा और परिवार के जीवन से जोड़ा जाता है।
नारद संहिता के शकुन विचारों के अनुसार यदि कोई कबूतर घर की छत, आंगन या बालकनी में शांत भाव से बैठता है या दाना चुगता है, तो इसे शुभ संकेत माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यह घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-शांति और माता लक्ष्मी की कृपा के आगमन का प्रतीक हो सकता है। वहीं सुबह के समय कबूतर की मधुर गुटरगूं को भी कुछ पारंपरिक मान्यताओं में आर्थिक प्रगति और रुके हुए कार्यों के आगे बढ़ने का संकेत माना गया है।
Vastu Tips : हालांकि, वास्तु शास्त्र और नारद संहिता में यह भी उल्लेख मिलता है कि यदि कबूतर घर के अंदर स्थायी रूप से घोंसला बना ले, जैसे अलमारी के ऊपर, खिड़की के पीछे या बालकनी के शेड में, तो इसे शुभ नहीं माना जाता। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इससे घर में अव्यवस्था, मानसिक तनाव और आर्थिक अस्थिरता जैसी परिस्थितियों का संकेत माना गया है।
वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि घोंसले के कारण जमा होने वाली गंदगी और अव्यवस्था घर की सकारात्मक ऊर्जा को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, इन मान्यताओं का आधार धार्मिक और पारंपरिक विश्वास हैं और इनके समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इन्हें आस्था और व्यक्तिगत मान्यताओं के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
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