





नई दिल्ली (वीकैंड रिपोर्ट)- Iran Qeshm Island Explosions : अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से ठीक पहले ईरान में हुए सिलसिलेवार धमाकों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ा दी है। सोमवार को ईरान के केश्म द्वीप पर कम से कम पांच जोरदार विस्फोट होने की खबर सामने आई। इसके अलावा बंदर लेंगेह शहर में भी धमाकों की सूचना मिली है। अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि इन घटनाओं के पीछे अमेरिका की भूमिका हो सकती है। हालांकि, ईरानी मीडिया ने अभी तक इन धमाकों में अमेरिका या इजराइल की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसी बीच ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि देश की सेना ने अमेरिका के दो MQM-170 जासूसी ड्रोन मार गिराए हैं। इन घटनाओं के बाद मध्य पूर्व में सैन्य तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
अमेरिका के लिए क्यों अहम है केश्म द्वीप?
करीब 1,445 वर्ग किलोमीटर में फैला केश्म ईरान का सबसे बड़ा द्वीप है। पहले यह पर्यटन और मुक्त व्यापार क्षेत्र के रूप में जाना जाता था, लेकिन समय के साथ यहां ईरान ने अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत की है। होर्मुज स्ट्रेट के प्रवेश द्वार के पास स्थित होने के कारण इस द्वीप का रणनीतिक महत्व काफी अधिक है। यहां से समुद्री गतिविधियों पर नजर रखना आसान माना जाता है।
भूमिगत सुरंगों में मिसाइल और सैन्य उपकरण होने का दावा
रिपोर्टों के अनुसार, केश्म द्वीप के नीचे सुरंगों और नमक की प्राकृतिक गुफाओं का बड़ा नेटवर्क मौजूद है। माना जाता है कि ईरान ने इन भूमिगत ठिकानों में तटीय मिसाइल सिस्टम और तेज गति से हमला करने वाली सैन्य नौकाएं तैनात कर रखी हैं। इन ठिकानों के जरिए ईरान समुद्री क्षेत्र में अपनी सैन्य क्षमता बनाए रखता है। हालांकि, भूमिगत सैन्य ठिकानों से जुड़ी सभी जानकारियों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण के लिहाज से अहम है द्वीप
केश्म द्वीप की भौगोलिक स्थिति इसे सैन्य और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है। यहां से होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पर नजर रखी जा सकती है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस परिवहन मार्गों में शामिल है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी सैन्य टकराव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
Iran Qeshm Island Explosions : ट्रंप ने ईरान के साथ समझौते के दिए संकेत
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को संकेत दिया कि फिलहाल अमेरिका ईरान पर दोबारा हमला करने की योजना नहीं बना रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि तेहरान के साथ बातचीत के जरिए समझौता संभव हो सकता है। जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर सैन्य कार्रवाई की जा सकती है, तो ट्रंप ने इससे इनकार किया।
ट्रंप ने तेल की कीमतों में गिरावट का किया दावा
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ईरान के साथ बड़े युद्ध की आशंका कम होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट आई है। उनके मुताबिक, 31 अक्टूबर को कच्चे तेल की कीमत 118 डॉलर प्रति बैरल थी, जो 1 नवंबर को घटकर 108 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई।
धमाकों के पीछे की वजह अभी साफ नहीं
फिलहाल केश्म द्वीप और बंदर लेंगेह में हुए धमाकों के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। अमेरिका या इजराइल की भूमिका की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यदि जांच में किसी बड़ी सैन्य कार्रवाई की पुष्टि होती है, तो इसका असर अमेरिका-ईरान संबंधों, मध्य पूर्व की सुरक्षा और वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है।
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