
नवांशहर, 17 जून 2026 (वीकैंड रिपोर्ट)- Brick Kiln Industry Crisis : पंजाब में ईंट-भट्ठा उद्योग गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। मिट्टी की लगातार बढ़ती कीमतों, सीमित उपलब्धता और उत्पादन लागत में भारी बढ़ोतरी के कारण राज्य भर में ईंट-भट्ठों का अस्तित्व खतरे में पड़ता दिखाई दे रहा है। हालात यह हैं कि कभी पंजाब में करीब 3,000 ईंट-भट्ठे संचालित होते थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर लगभग 1,400 रह गई है। नवांशहर जिले की बात करें तो यहां संचालित 72 ईंट-भट्ठों में से 39 भट्ठे बंद हो चुके हैं। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि चुनौतियां इसी तरह बढ़ती रहीं तो आने वाले समय में और अधिक भट्ठों पर ताले लग सकते हैं।
मिट्टी की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई परेशानी
डिस्ट्रिक्ट नवांशहर ब्रिक किलन ओनर्स एसोसिएशन के प्रधान अशोक लडोइया ने बताया कि पहले मिट्टी की माइनिंग का ठेका करीब 60 हजार रुपये में मिल जाता था, जबकि अब लगभग दो एकड़ क्षेत्र की माइनिंग के लिए 2.18 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईंट निर्माण के लिए जरूरी मिट्टी के दाम पहले की तुलना में करीब चार गुना बढ़ चुके हैं। इतना ही नहीं, कई भट्ठा मालिकों को मिट्टी हासिल करने के लिए 60 से 70 किलोमीटर दूर तक जाना पड़ रहा है, जिससे परिवहन लागत भी बढ़ रही है।
मजदूरी और उत्पादन लागत में भारी उछाल
भट्ठा संचालकों के अनुसार मजदूरों की मजदूरी में भी लगातार वृद्धि हुई है। मई दिवस के बाद मजदूरी दरों में हुई बढ़ोतरी के चलते प्रति हजार ईंटों के उत्पादन पर लगभग 600 रुपये अतिरिक्त खर्च आ रहा है। इस बढ़ी हुई लागत का सीधा असर ईंटों की कीमतों पर भी पड़ रहा है, जिससे निर्माण क्षेत्र प्रभावित हो सकता है।
Brick Kiln Industry Crisis : कोयले की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
एसोसिएशन के अनुसार पहले कोयले पर 5 प्रतिशत जीएसटी लागू थी, जिसे बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया। इसके बाद कोयले की कीमत 13 हजार रुपये प्रति टन से बढ़कर 21 से 22 हजार रुपये प्रति टन तक पहुंच गई है। भट्ठा संचालकों का कहना है कि बढ़ती ईंधन लागत ने उद्योग की कमर तोड़ दी है और उत्पादन पहले से कहीं अधिक महंगा हो गया है।
पराली के भूसे के उपयोग की अनिवार्यता भी बनी चुनौती
उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार ईंट-भट्ठों में पराली के भूसे का उपयोग अनिवार्य किया गया है। वर्तमान में ईंट पकाने के लिए 30 प्रतिशत भूसे का इस्तेमाल करना जरूरी है, जिसे हर वर्ष 10 प्रतिशत बढ़ाया जाना है। हालांकि भट्ठा मालिकों का कहना है कि कोयले की तुलना में भूसे की ऊष्मा क्षमता (CV Value) कम होती है, जिससे उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित होती है और लागत बढ़ जाती है।
सरकार से राहत की मांग
ईंट-भट्ठा उद्योग से जुड़े संगठनों ने सरकार से मांग की है कि उद्योग को बचाने और लाखों परिवारों के रोजगार की सुरक्षा के लिए व्यावहारिक और उद्योग समर्थक नीतियां लागू की जाएं। उनका कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो राज्य में ईंट-भट्ठा उद्योग और गहरे संकट में फंस सकता है।
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