
अमृतसर, 16 जून 2026 (वीकैंड रिपोर्ट)- Bhagwant Mann Akal Takht Controversy : पंजाब की राजनीति और सिख धार्मिक जगत से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को ‘गुरु दोखी’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित कर दिया है। यह फैसला उस कथित वीडियो विवाद को लेकर लिया गया है, जिसमें मुख्यमंत्री पर ‘गुरु की गोलक’ को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने और बाद में इस मामले में गलत जानकारी देने के आरोप लगाए गए हैं। अमृतसर में आयोजित ‘पांच सिंह साहिबानों’ की बैठक के बाद अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने यह आदेश सुनाया। उन्होंने कहा कि संबंधित वीडियो की दो अलग-अलग फोरेंसिक लैब में जांच करवाई गई थी और दोनों रिपोर्टों में वीडियो को असली बताया गया है। उनके अनुसार वीडियो में किसी प्रकार की छेड़छाड़ या कृत्रिम तकनीक (AI) का इस्तेमाल नहीं पाया गया।
मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप
ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ‘गुरु की गोलक’ को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिससे सिख भावनाओं को ठेस पहुंची। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में अकाल तख्त के समक्ष मुख्यमंत्री द्वारा सही जानकारी नहीं दी गई, जिसके चलते सर्वसम्मति से उन्हें ‘गुरु दोखी’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित करने का फैसला लिया गया।
जनवरी में मांगा गया था जवाब
अकाल तख्त सचिवालय के अनुसार इस मामले में जनवरी माह में मुख्यमंत्री से स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन निर्धारित समय के भीतर कोई संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं हुआ। जत्थेदार ने कहा कि मुख्यमंत्री का पद अत्यंत सम्मानजनक होता है और ऐसे पद पर बैठे व्यक्ति से अधिक जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है।
Bhagwant Mann Akal Takht Controversy : AAP ने फैसले पर उठाए सवाल
वहीं, आम आदमी पार्टी ने अकाल तख्त के इस फैसले पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी के पंजाब मीडिया प्रभारी बलतेज सिंह पन्नू ने कहा कि फोरेंसिक रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति वास्तव में कौन है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है।
29 जून को तलब किए गए मंत्री और विधायक
अकाल तख्त ने पंजाब मंत्रिमंडल के सिख मंत्रियों और सिख विधायकों को भी 29 जून को अपने समक्ष पेश होने के निर्देश दिए हैं। यह समन राज्य सरकार द्वारा पारित ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ को लेकर जारी किया गया है। अकाल तख्त और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) पहले भी इस कानून पर आपत्ति जता चुके हैं। उनका कहना है कि इस विधेयक को लागू करने से पहले सिख पंथ के प्रतिनिधियों और धार्मिक संस्थाओं से पर्याप्त सलाह-मशवरा नहीं किया गया। इस घटनाक्रम के बाद पंजाब की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
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