
जालंधर (वीकैंड रिपोर्ट)-Maa Baglamukhi Hawan : मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में मां बगलामुखी जी के निमित सामुहिक सापताहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया। सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान दिशांत शर्मा परिवार से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन, नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई। सिद्ध माँ बगलामुखी धाम में आयोजित दिव्य हवन यज्ञ के दौरान पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्तिभाव से ओत-प्रोत दिखाई दिया। अलौकिक हवन कुंड में प्रज्वलित पावन अग्नि अपनी दिव्य आभा बिखेर रही थी, जबकि वैदिक मंत्रोच्चारण की गूंज से संपूर्ण धाम भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु भक्ति और श्रद्धा में लीन होकर माँ भगवती का स्मरण कर रहे थे। इस पावन अवसर पर धाम के प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज ने सूफी संतों की अमूल्य वाणी के माध्यम से श्रद्धालुओं को जीवन का गहन संदेश दिया। उन्होंने कहा—

मैं नींवा मेरा मुरशद उच्चा, उच्चयां दे संग लाई।
सदके जावां एना उच्चयां तो जिन्हा नीवियां नाल निभाई।।
इन पंक्तियों का भावार्थ समझाते हुए उन्होंने कहा कि संसार में दो प्रकार के लोग होते हैं। एक वे जो हर समय ऊँचा बनने की दौड़ में लगे रहते हैं और दूसरे वे जो नम्रता को अपना आभूषण बना लेते हैं। जो व्यक्ति अहंकार के सहारे ऊँचा उठना चाहता है, वह लोगों के दिलों से दूर हो जाता है, जबकि विनम्र व्यक्ति परमात्मा के अधिक निकट पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि परमात्मा की कृपा वहीं बरसती है जहां अहंकार का वास नहीं होता। जिस पात्र में पहले से कुछ भरा हो, उसमें नया कुछ नहीं डाला जा सकता। उसी प्रकार अहंकार से भरे मन में न गुरु की शिक्षा समाती है और न ही प्रभु का नाम।

नवजीत भारद्वाज जी ने आगे कहा—
जे मैं वेखां करम अपने, कुछ न मेरे पल्ले।
जे मैं वेखां रहमत ओस दी तां मेरे भाग सवल्ले।।

Maa Baglamukhi Hawan : उन्होंने समझाया कि मनुष्य जब अपने जीवन पर दृष्टि डालता है तो उसे अनुभव होता है कि जो कुछ भी उसे प्राप्त हुआ है, वह केवल उसके प्रयासों का परिणाम नहीं है, बल्कि परमात्मा की असीम कृपा का फल है। संसार में अनेक लोग हमसे अधिक योग्य होते हुए भी वह नहीं पा सके जो हमें मिला है। इसलिए हर उपलब्धि के लिए प्रभु का धन्यवाद करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सूरज बिना भेदभाव के सबको प्रकाश देता है, वर्षा सब पर समान रूप से होती है और वायु सभी को जीवन प्रदान करती है। परमात्मा भी अपनी कृपा का हिसाब नहीं रखता। वह तो दाता है और हम सब उसके द्वार के याचक हैं। जो व्यक्ति अपनी सफलता का श्रेय केवल स्वयं को देता है, वह अहंकार में डूब जाता है, जबकि जो सब कुछ प्रभु की कृपा मानता है, उसके भीतर कृतज्ञता और विनम्रता का भाव जागृत होता है।

भक्ति की गहराइयों को समझाते हुए उन्होंने सूफी वाणी की इन पंक्तियों का उल्लेख किया—
माली बाग दी राखी करदा, फल कच्चे होन या पक्के।
मुरशद सब ते रहमत करदा, चेला पक्के होन या कच्चे।।
उन्होंने कहा कि सच्चा गुरु कभी अपने शिष्यों को उनकी कमियों से नहीं आंकता। जैसे एक माली बाग के हर पौधे की देखभाल करता है, वैसे ही गुरु अपने हर शिष्य पर कृपा दृष्टि रखता है। किसी को आज नाम का रस मिल गया, किसी को कल मिलेगा। कोई आज समझ गया, कोई वर्षों बाद समझेगा। लेकिन गुरु की रहमत सबके साथ चलती रहती है।

Maa Baglamukhi Hawan : अपने प्रवचनों के समापन पर नवजीत भारद्वाज जी ने कहा कि धर्म का वास्तविक सार आत्मचिंतन में निहित है। दूसरों की कमियां देखने से पहले व्यक्ति को स्वयं के भीतर झांकना चाहिए। अहंकार कहता है- ‘‘मैं हूँ’’, जबकि भक्ति कहती है-‘‘सब तू ही तू है।’’ अहंकार मनुष्य और परमात्मा के बीच दूरी पैदा करता है, जबकि नम्रता उसे प्रभु से जोड़ती है। उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि अपने कर्मों पर घमंड करने के बजाय प्रभु की कृपा का शुक्राना करें। क्योंकि जो आज कच्चा है, वह गुरु की कृपा से कल पक्का बन सकता है। जो झुकना सीख लेता है, वही वास्तव में परमात्मा की नजर में सबसे ऊँचा बन जाता है।

इस अवसर पर श्वेता भारद्वाज,सरोज बाला, समीर कपूर, विक्की अग्रवाल, दिनेश सेठ,सौरभ भाटिया,जानू थापर,दिनेश चौधरी,नरेश,कोमल, मुनीष मैहरा, ऋषभ कालिया,रिंकू सैनी, कमलजीत,बलजिंदर सिंह,धर्मपालसिंह, अमरजीत सिंह, उदय ,अजीत कुमार , नरेंद्र ,रोहित भाटिया,बावा जोशी,राकेश शर्मा, अमरेंद्र सिंह,नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत,मनीष शर्मा,परमजीत सिंह, दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू, गुलशन शर्मा,संजीव शर्मा, रोहित भाटिया,मुकेश, रजेश महाजन ,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा, ऐडवोकेट शर्मा,वरुण, नितिश,रोमी, भोला शर्मा,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल , अश्विनी शर्मा , रवि भल्ला,जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक, प्रिंस कुमार,दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ,दीपक कुमार, नरेश,दिक्षित, अनिल सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।
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