
नई दिल्ली, 29 मई 2026 (वीकैंड रिपोर्ट)- CBSE 12th Result Controversy : सीबीएसई की नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। 12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणामों पर उठ रहे सवालों के बीच पिछले 25 वर्षों से कॉपियां जांच रहे वरिष्ठ परीक्षक जीके श्रीवास्तव ने मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर दावे किए हैं। उनका कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को पर्याप्त तैयारी और प्रशिक्षण के बिना लागू किया गया, जिसका असर लाखों छात्रों के परिणामों पर पड़ सकता है।
‘बिना तैयारी लागू कर दी गई नई प्रणाली’
वरिष्ठ परीक्षक जीके श्रीवास्तव के अनुसार शिक्षकों को नई डिजिटल प्रणाली के लिए केवल 7 से 10 दिन का प्रशिक्षण दिया गया, जो इतने बड़े स्तर की परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया के लिए पर्याप्त नहीं था। उनका कहना है कि कई अनुभवी शिक्षक भी नई तकनीकी प्रक्रिया को पूरी तरह समझ नहीं पाए, जिससे मूल्यांकन के दौरान समस्याएं सामने आईं। उन्होंने दावा किया कि कॉपियां जांचते समय बार-बार तकनीकी दिक्कतें आती रहीं। कई बार सिस्टम हैंग हो जाता था, पेज खुलने में काफी समय लगता था और उत्तर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते थे।
ब्लर कॉपियों से बढ़ी परेशानी
श्रीवास्तव ने सबसे गंभीर मुद्दा कॉपियों की स्कैनिंग क्वालिटी को बताया। उनके अनुसार कई उत्तर पुस्तिकाएं इतनी धुंधली थीं कि छात्रों की लिखावट, डायग्राम और फॉर्मूले तक साफ दिखाई नहीं दे रहे थे। उन्होंने बताया कि कई बार फिजिक्स और गणित जैसे विषयों में पूरे फॉर्मूले स्क्रीन पर अधूरे दिखाई देते थे। ऐसी स्थिति में परीक्षकों को अपने अनुभव और अनुमान के आधार पर अंक देने पड़े, जिससे मूल्यांकन की सटीकता प्रभावित हो सकती है।
गायब पन्नों और खाली पेज का दावा
वरिष्ठ परीक्षक ने यह भी दावा किया कि कुछ उत्तर पुस्तिकाओं में पन्ने गायब दिखाई दिए। उनके अनुसार कई मामलों में पेज नंबर क्रम से मौजूद नहीं थे और कुछ पन्ने पूरी तरह खाली दिखाई दे रहे थे, जबकि छात्रों ने उन पर उत्तर लिखे थे। उन्होंने कहा कि इस तरह की तकनीकी खामियों के कारण छात्रों के अंक प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
CBSE 12th Result Controversy : सर्वर की धीमी गति बनी बड़ी समस्या
डिजिटल मूल्यांकन के दौरान सर्वर संबंधी समस्याएं भी सामने आईं। परीक्षकों के मुताबिक एक पेज से दूसरे पेज पर जाने में काफी समय लग रहा था और कई बार उत्तर पुस्तिका अचानक स्क्रीन से गायब हो जाती थी। इससे न केवल मूल्यांकन प्रक्रिया धीमी हुई बल्कि शिक्षकों पर मानसिक दबाव भी बढ़ा, जिसका असर कॉपियों की जांच की गुणवत्ता पर पड़ सकता है।
पहले होती थी कई स्तरों पर जांच
श्रीवास्तव के अनुसार पहले मैनुअल मूल्यांकन में कॉपियों की कई स्तरों पर जांच होती थी। परीक्षक, असिस्टेंट हेड एग्जामिनर, हेड एग्जामिनर और अन्य अधिकारी अंकन प्रक्रिया की समीक्षा करते थे। लेकिन नई प्रणाली में जांच की परतें कम हो गईं, जिससे त्रुटियों की संभावना बढ़ सकती है।
छात्रों और अभिभावकों में बढ़ी चिंता
परिणाम घोषित होने के बाद कई छात्रों ने अपेक्षा से कम अंक मिलने को लेकर सवाल उठाए हैं। कुछ छात्रों का दावा है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद बोर्ड परीक्षा में उनके अंक उम्मीद से काफी कम आए हैं। इसी वजह से सोशल मीडिया पर भी सीबीएसई की मूल्यांकन प्रणाली को लेकर बहस तेज हो गई है।
शिक्षा मंत्री ने स्वीकार की जिम्मेदारी
विवाद बढ़ने के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मूल्यांकन प्रक्रिया में सामने आई तकनीकी समस्याओं की जिम्मेदारी स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी छात्र के साथ अन्याय हुआ है तो उसकी शिकायत का समाधान किया जाएगा। मंत्री के अनुसार इस वर्ष करीब 17 लाख छात्रों की लगभग 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटल मूल्यांकन किया गया और अब बड़े स्तर पर पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
CBSE 12th Result Controversy : राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी मूल्यांकन प्रक्रिया और OSM प्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं शिक्षा मंत्रालय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि छात्रों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
क्या होगा आगे?
सीबीएसई और शिक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि छात्रों की शिकायतों की समीक्षा की जाएगी और यदि कहीं तकनीकी त्रुटि पाई जाती है तो आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। ऐसे में अब लाखों छात्र और अभिभावक पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।
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