
नई दिल्ली, 20 मई 2026 (वीकैंड रिपोर्ट)- Internet Cable Crisis : ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सिर्फ तेल, गैस और ग्लोबल सप्लाई चेन तक सीमित नहीं रहा। दुनिया के सामने अब एक नई और बेहद गंभीर चिंता उभरकर सामने आई है — इंटरनेट संकट। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में हालात और बिगड़ते हैं, तो इसका असर दुनिया भर की इंटरनेट सेवाओं पर पड़ सकता है, जिसमें भारत भी शामिल है।
दरअसल हाल ही में ईरान के सैन्य प्रवक्ता Ebrahim Zolfaqhari ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म [X (Twitter)](https://x.com?utm_source=chatgpt.com) पर बयान देते हुए कहा कि “हम इंटरनेट केबल पर शुल्क लगाएंगे।” यह बयान सुनने में भले साधारण लगे, लेकिन इसके पीछे दुनिया की डिजिटल व्यवस्था से जुड़ा बेहद बड़ा खतरा छिपा हुआ है।
समुद्र के नीचे बिछा है दुनिया का इंटरनेट
आज दुनिया का अधिकांश इंटरनेट समुद्र के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबल्स के जरिए चलता है। यही केबल्स अलग-अलग देशों और महाद्वीपों को आपस में जोड़ती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार Strait of Hormuz के नीचे इंटरनेट केबल्स का एक विशाल नेटवर्क मौजूद है। यह वही इलाका है जो दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में गिना जाता है। अब सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसी रास्ते से दुनिया के कई बड़े इंटरनेट नेटवर्क भी गुजरते हैं, जो एशिया, अफ्रीका और यूरोप को जोड़ते हैं।
Internet Cable Crisis : किन-किन इंटरनेट केबल्स पर मंडरा रहा खतरा?
रिपोर्ट के अनुसार इस इलाके से गुजरने वाली प्रमुख इंटरनेट केबल्स में FALCON, GBICS, 2Africa, SeaMeWe 6 और AAE-1 जैसी बड़ी अंडरसी केबल्स शामिल हैं। ये केबल्स दुनिया भर में इंटरनेट ट्रैफिक, डेटा ट्रांसफर, बैंकिंग नेटवर्क, क्लाउड सर्विस और डिजिटल कम्युनिकेशन का बड़ा हिस्सा संभालती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन केबल्स पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है, सप्लाई बाधित होती है या किसी तरह का नुकसान पहुंचता है, तो इसका असर इंटरनेट स्पीड, डेटा लागत और डिजिटल सेवाओं पर दिखाई दे सकता है।
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
भारत के लिए यह मामला बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि इन केबल्स में से कई सीधे भारत तक आती हैं और Mumbai तथा Chennai में जुड़ती हैं। इन्हीं नेटवर्क्स के जरिए भारत खाड़ी देशों, यूरोप और अफ्रीका से डिजिटल रूप से जुड़ा हुआ है। देश की बड़ी टेलीकॉम कंपनियां जैसे Bharti Airtel और Reliance Jio भी इन्हीं अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क्स पर निर्भर हैं। ऐसे में यदि होर्मुज क्षेत्र में इंटरनेट केबल्स प्रभावित होती हैं, तो भारत में इंटरनेट सेवाओं, ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई पेमेंट, वीडियो स्ट्रीमिंग और क्लाउड सर्विस पर असर पड़ सकता है।
सिर्फ सोशल मीडिया नहीं, पूरी जिंदगी इंटरनेट पर निर्भर
आज इंटरनेट केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा। बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, ऑनलाइन पढ़ाई, ऑफिस वर्क, ई-कॉमर्स, वीडियो कॉलिंग और कंपनियों का पूरा डेटा नेटवर्क इसी पर निर्भर करता है। यदि इंटरनेट स्लो होता है, महंगा होता है या कुछ समय के लिए बाधित होता है, तो इसका असर सीधे आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्र के नीचे बिछी केबल्स में खराबी आने पर उन्हें ठीक करना भी बेहद मुश्किल और समय लेने वाला काम होता है।
Internet Cable Crisis : दुनिया के लिए नया डिजिटल खतरा
विशेषज्ञ मानते हैं कि आधुनिक दौर में युद्ध सिर्फ जमीन और आसमान तक सीमित नहीं रहा। अब ऊर्जा, साइबर सुरक्षा और इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर भी बड़े हथियार बन चुके हैं। यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो आने वाले समय में इंटरनेट भी दबाव बनाने का नया माध्यम बन सकता है। यही वजह है कि अब ईरान-अमेरिका तनाव को सिर्फ सैन्य संघर्ष नहीं, बल्कि दुनिया की डिजिटल और आर्थिक स्थिरता के लिए भी बड़ा खतरा माना जा रहा है।
-----------------------------------------------------------------
देश-दुनिया की ताजा खबरों के लिए >>>Join WhatsApp Group Join<<< करें। आप हमें >>>Facebook<<< फॉलो कर सकते हैं। लेटेस्ट खबरें देखने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल को भी सबस्क्राइब करें।
-----------------------------------------------------------------


