
सूरत, 1 मई 2026 (वीकैंड रिपोर्ट)- Barrier-Free Toll : भारत में हाईवे यात्रा को तेज, स्मार्ट और पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। गुजरात के सूरत में एनएच-48 स्थित चोर्यासी टोल प्लाजा पर देश का पहला बैरियर-फ्री मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम लागू कर दिया गया है। इस नई तकनीक के जरिए अब वाहन बिना रुके टोल प्लाजा पार कर सकेंगे, जिससे लंबी कतारों और जाम से राहत मिलेगी।
यह अत्याधुनिक सिस्टम हाई-टेक सेंसर, कैमरों और ओवरहेड स्ट्रक्चर के जरिए वाहनों की पहचान करता है और टोल राशि अपने-आप कट जाती है। पहले जहां टोल बैरियर पर रुकना जरूरी होता था, अब यह पूरी प्रक्रिया ऑटोमेटेड हो गई है, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। इस पहल की घोषणा केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari ने ‘लॉजिस्टिक्स शक्ति समिट एंड अवार्ड्स 2026’ के दौरान की थी। उन्होंने कहा कि यह तकनीक देश के हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने और लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में अहम भूमिका निभाएगी।
Barrier-Free Toll : नई टोलिंग प्रणाली में FASTag को ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक के साथ जोड़ा गया है। एआई आधारित कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट को स्कैन करते हैं, जबकि RFID रीडर FASTag को पढ़ते हैं। इसके बाद टोल राशि सीधे वाहन मालिक के लिंक्ड बैंक खाते से कट जाती है। यह ड्यूल वेरिफिकेशन सिस्टम अधिक सटीक और पारदर्शी है।
खास बात यह है कि जिन वाहनों में FASTag नहीं है या वह निष्क्रिय है, उन्हें भी नंबर प्लेट के जरिए पहचान लिया जाएगा, जिससे टोल वसूली में किसी तरह की चूक नहीं होगी। इस नई व्यवस्था के लागू होने से हाईवे पर सफर पहले से अधिक सुगम और तेज हो जाएगा। लंबे इंतजार और रुकावटों से छुटकारा मिलेगा, जिससे यात्रियों के समय के साथ-साथ ईंधन की भी बचत होगी। इसे भारत के स्मार्ट और डिजिटल हाईवे नेटवर्क की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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