
वॉशिंगटन, 25 अप्रैल 2026 (वीकैंड रिपोर्ट)- NASA Moon Mission 2028 : अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने आने वाले वर्षों के लिए अपनी नई स्पेस रणनीति का ऐलान किया है, जिसमें 2028 तक इंसानों को दोबारा चांद पर भेजने, वहां स्थायी बेस स्थापित करने और लो-अर्थ ऑर्बिट में कमर्शियल गतिविधियों को बढ़ावा देने जैसे बड़े लक्ष्य शामिल हैं। जेरेड आइज़कमैन ने कहा कि यह नई रणनीति अमेरिका की राष्ट्रीय अंतरिक्ष नीति के अनुरूप तैयार की गई है और तेजी से बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच अमेरिका की अंतरिक्ष क्षेत्र में लीडरशिप मजबूत करने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य चांद पर वापसी करना, लॉन्च की संख्या बढ़ाना और 2028 तक अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह पर उतारना है।”
चांद पर स्थायी मौजूदगी की तैयारी
NASA सिर्फ चांद तक पहुंचने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वहां लंबे समय तक इंसानी मौजूदगी स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है। इसके लिए सरकार और निजी कंपनियां मिलकर लैंडर, रोवर, पावर सिस्टम और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी विकसित करेंगी, ताकि चंद्रमा पर लगातार ऑपरेशन संभव हो सके।
लो-अर्थ ऑर्बिट में बढ़ेगा बिजनेस
नई रणनीति का तीसरा बड़ा फोकस लो-अर्थ ऑर्बिट में कमर्शियल गतिविधियों का विस्तार करना है। इसके तहत प्राइवेट स्पेस स्टेशन को बढ़ावा दिया जाएगा और उद्योगों के लिए नए अवसर तैयार किए जाएंगे। आइजकमैन ने कहा कि NASA अब बड़े और महंगे प्रोजेक्ट्स की बजाय छोटे, केंद्रित और परिणाम देने वाले निवेश पर जोर देगा।
NASA Moon Mission 2028 : Artemis मिशन बना बड़ी उम्मीद
हाल ही में आर्टेमिस II मिशन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब योजनाओं को सही तरीके से लागू किया जाता है तो बड़े परिणाम सामने आते हैं। इस मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की कक्षा तक ले जाकर सुरक्षित वापस लाया गया था। उन्होंने कहा, “हमने दुनिया को फिर से चांद दिखाया और इंसानियत को पृथ्वी को देखने का नया नजरिया दिया।”
बजट कटौती पर उठे सवाल
हालांकि, इस नई रणनीति को लेकर अमेरिकी सांसदों ने चिंता भी जताई है। प्रस्तावित बजट में पिछले साल की तुलना में करीब 23 प्रतिशत कटौती की बात सामने आई है, जिससे इन महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल करना मुश्किल हो सकता है। ब्रायन बैबिन ने चेतावनी दी कि कम फंडिंग अमेरिका की अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा को कमजोर कर सकती है, खासकर ऐसे समय में जब चीन तेजी से अपने चंद्र मिशनों को आगे बढ़ा रहा है।
वहीं ज़ो लोफ़ग्रेन ने कहा कि इस योजना का असर विज्ञान, टेक्नोलॉजी, अर्थ साइंस और एरोनॉटिक्स रिसर्च से जुड़े कई अहम कार्यक्रमों पर पड़ सकता है। 1958 में स्थापित NASA लंबे समय से अंतरिक्ष अनुसंधान में दुनिया का नेतृत्व करता रहा है। अब आर्टेमिस कार्यक्रम के जरिए 1972 के बाद पहली बार इंसानों को फिर से चांद पर भेजने की तैयारी तेज कर दी गई है।
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