

वॉशिंगटन (वीकैंड रिपोर्ट)- US H-4 EAD Automatic Extension : अमेरिका में H-4 वीजा पर रह रहे हजारों परिवारों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। कैलिफोर्निया की एक संघीय जिला अदालत ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लागू किए गए उस नियम पर अंतरिम रोक लगाई है, जिसके तहत Employment Authorization Document (EAD) के ऑटोमैटिक एक्सटेंशन की सुविधा समाप्त कर दी गई थी। अदालत का यह फैसला फिलहाल केवल सात याचिकाकर्ताओं तक सीमित है, लेकिन इसे H-4 वीजा धारकों और विशेष रूप से भारतीय मूल के परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी जीत माना जा रहा है।
क्या था ट्रंप प्रशासन का नया नियम?
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने 30 अक्टूबर 2025 को एक Interim Final Rule जारी किया था। इस नियम के तहत कई श्रेणियों में EAD के ऑटोमैटिक एक्सटेंशन की सुविधा खत्म कर दी गई थी। नए प्रावधानों के अनुसार, 30 अक्टूबर 2025 या उसके बाद दाखिल किए गए EAD रिन्यूअल आवेदनों पर पहले की तरह स्वतः अवधि बढ़ाने की सुविधा उपलब्ध नहीं रही। इससे उन लोगों की चिंता बढ़ गई थी जिनके EAD नवीनीकरण आवेदन लंबित रहते हैं और इस दौरान उनके मौजूदा वर्क परमिट की अवधि समाप्त हो जाती है।
H-4 वीजा धारकों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
H-4 वीजा आमतौर पर अमेरिका में काम कर रहे H-1B वीजा धारकों के पति या पत्नी को दिया जाता है। पात्र H-4 जीवनसाथी C26 श्रेणी के तहत EAD प्राप्त कर अमेरिका में नौकरी कर सकते हैं। पहले समय पर रिन्यूअल आवेदन करने पर कई मामलों में EAD स्वतः बढ़ जाता था, जिससे नौकरी जारी रखने में कोई बाधा नहीं आती थी। लेकिन नए नियम के बाद कई लोगों को नौकरी छूटने और आय रुकने का खतरा पैदा हो गया था। इसी वजह से अदालत का यह फैसला H-4 वीजा धारकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में क्या दलील दी?
मामले में शामिल सात H-4 जीवनसाथियों ने अदालत में तर्क दिया कि DHS ने ऑटोमैटिक एक्सटेंशन समाप्त करते समय Administrative Procedure Act (APA) के तहत जरूरी सार्वजनिक नोटिस और सुझाव प्रक्रिया का पालन नहीं किया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि USCIS में लंबी प्रोसेसिंग अवधि के कारण EAD की वैधता समाप्त होने और नए कार्ड के जारी होने के बीच रोजगार छिनने का गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
US H-4 EAD Automatic Extension : कोर्ट ने सरकार की दलील क्यों नहीं मानी?
10 सितंबर 2026 को सुनाए गए आदेश में कैलिफोर्निया के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज डेविड ओ. कार्टर ने सातों याचिकाकर्ताओं को प्रारंभिक राहत प्रदान की। अदालत ने कहा कि DHS यह साबित नहीं कर सका कि नियम लागू करने के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया था। सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और कड़ी जांच की जरूरत का हवाला दिया था, लेकिन अदालत ने इन तर्कों को पर्याप्त नहीं माना।
सभी H-4 धारकों को नहीं मिली है राहत
हालांकि यह फैसला महत्वपूर्ण है, लेकिन अदालत ने इसे पूरे देश में लागू होने वाला आदेश नहीं बनाया है। इसका मतलब है कि अमेरिका में मौजूद सभी H-4 EAD धारकों को इस फैसले का सीधा लाभ नहीं मिलेगा। फिलहाल यह राहत केवल उन सात लोगों तक सीमित है जिन्होंने अदालत में याचिका दायर की थी। मामला अभी कानूनी प्रक्रिया में है और भविष्य में इस पर बड़े फैसले आ सकते हैं।
भारतीय परिवारों पर क्या होगा असर?
अमेरिका में H-1B वीजा पर काम करने वाले पेशेवरों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक है। उनके हजारों जीवनसाथी H-4 वीजा पर अमेरिका में रहते हैं और EAD के माध्यम से रोजगार प्राप्त करते हैं। ऐसे में अदालत का यह फैसला भारतीय समुदाय के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसे अभी सभी H-4 वीजा धारकों के लिए स्थायी राहत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि अंतिम कानूनी निर्णय आना बाकी है।
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