
नई दिल्ली (वीकैंड रिपोर्ट) : Goswami Tulsidas Jayanti : कल गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती है। हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है, जोकि इस साल 23 अगस्त को इस साल उनकी 526वीं जयंती मनाई जा रही है। हिंदू महाकाव्य रामचरितमानस, हनुमान चालीसा समेत तमाम ग्रंथों की रचना करने वालें तुलसीदास ने अपना पूरा जीवन श्रीराम की भक्ति और साधना में व्यतीत किया। गोस्वामी तुलसीदास जी का जन्म उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में हुआ था। वे सरयूपारी ब्राह्मण थे। जन्म लेते ही तुलसीदास जी के मुख से ‘राम’ नाम का शब्द निकला था इसलिए, उनका नाम रामबोला रख दिया गया था।
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गोस्वामी तुलसीदास 16वीं सदी के महान संत और कवि हुए। वह श्रीरामचरितमानस, कवितावली, जानकीमंगल, विनयपत्रिका, गीतावली, हनुमान चालीसा, बरवै रामायण के रचयिता हैं। बचपन में मां के देहांत के बाद पिता भी तुलसीदास जी के लालन-पालन की जिम्मेदाराी से पीछे हट गए। एक दिन सरयू नदी के किनारे पर गोस्वामी तुलसीदास प्रवचन दे रहे थे। वे अक्सर यहां प्रवचन देते थे। इस दौरान तुलसीदास जी लोगों की समस्याओं का समाधान भी करते थे। एक दिन तुलसीदास जी आंखें बंद करके जप कर रहे थे। एक व्यक्ति ने पूछा कि आप आंखें बंद कर किसे याद कर रहे हैं? तुलसीदास जी बोले कि मेरे राम को। उस व्यक्ति ने फिर पूछा कि तो क्या ये जरूरी है कि भगवान के नाम का जप किया जाए?
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Goswami Tulsidas Jayanti : तुलसीदास जी ने कहा कि हां, ये तो बहुत जरूरी है। नाम जप करने से मन काबू में रहता है। जिन लोगों का मन काबू रहता है, वे शांत रहते हैं। उस व्यक्ति ने फिर पूछा कि जब मैं नाम जप करने बैठता हूं तो मन नहीं लगता है, मुझे क्या करना चाहिए? तुलसीदास जी बोले कि कई लोगों की ये समस्या है, जप में मन नहीं लगता। इस कारण लोग भक्ति करना ही छोड़ देते हैं। एक बात हमेशा ध्यान रखें, मन लगे या न लगे, हमें जप करते रहना चाहिए। हमारा मन एक भूमि की तरह है। भूमि में बीज बोने पर उससे पौधा जरूर उगता है, बीज उल्टा गिरे या सीधा, पौधा तो उगता ही है।
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