
मोहाली, 8 जून 2026 (वीकैंड रिपोर्ट)- Mohali Verka Milk Vending Van : पंजाब के मोहाली जिले में अब लोगों को वेरका दूध पहले से सस्ते दाम पर उपलब्ध होगा। पर्यावरण संरक्षण और सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम करने के उद्देश्य से पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (PPCB) और वेरका मिल्क प्लांट मोहाली ने एक नई पहल शुरू की है। इसके तहत ए.टी.एस. कासा एस्पाना रिहायशी सोसाइटी में ‘मोबाइल मिल्क वेंडिंग वैन’ की शुरुआत की गई है, जहां उपभोक्ताओं को वेरका दूध 2 रुपये प्रति लीटर कम कीमत पर मिलेगा।
इस योजना के तहत लोग अपने घर से दोबारा इस्तेमाल होने वाले बर्तन, बोतल या डिब्बा लेकर आएंगे और सीधे वेंडिंग वैन से ताजा दूध खरीद सकेंगे। वेरका दूध जहां सामान्य प्लास्टिक पाउच में 66 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध होता है, वहीं मोबाइल वेंडिंग वैन से यह केवल 64 रुपये प्रति लीटर में मिलेगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्लास्टिक पैकेजिंग के इस्तेमाल को कम करना और लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाना है। अधिकारियों का मानना है कि यदि लोग अपने कंटेनर में दूध खरीदने की आदत अपनाते हैं तो इससे बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरे को कम किया जा सकता है।
Mohali Verka Milk Vending Van : जानकारी के अनुसार मोबाइल मिल्क वेंडिंग मशीन की क्षमता लगभग 300 लीटर है और इसे प्रतिदिन ए.टी.एस. कासा एस्पाना परिसर में लगाया जाएगा। अनुमान लगाया गया है कि इस व्यवस्था के पूरी तरह लागू होने पर केवल एक रिहायशी सोसाइटी में प्रतिदिन करीब 600 प्लास्टिक दूध पाउच का उपयोग बंद हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई परिवार रोजाना इस प्रणाली के माध्यम से 2 लीटर दूध खरीदता है, तो वह सालभर में लगभग 4 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा पैदा होने से रोक सकता है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि छोटी-सी आदत में बदलाव पर्यावरण संरक्षण में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए केवल कचरा प्रबंधन व्यवस्था मजबूत करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों की दैनिक आदतों में भी बदलाव जरूरी है। इसी सोच के तहत इस पायलट प्रोजेक्ट को शुरू किया गया है। यदि यह मॉडल सफल साबित होता है तो PPCB और वेरका मिलकर इसे मोहाली की अन्य रिहायशी सोसाइटियों तक विस्तार देंगे। भविष्य में पंजाब के अन्य शहरों और कस्बों में भी मोबाइल वेंडिंग वैन या स्थायी मिल्क वेंडिंग यूनिट्स स्थापित की जा सकती हैं। यह पहल सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ पर्यावरण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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