
जालंधर (वीकैंड रिपोर्ट)- Bus Strike in Punjab : पंजाब में पंजाब रोडवेज–पनबस/पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 25/11 को राज्यभर के सभी डिपुओं पर गेट रैलियां की गईं। बठिंडा डिपो में हुई रैली को संबोधित करते हुए यूनियन के प्रदेश नेता सरबजीत सिंह भुल्लर ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार युवाओं को रोजगार देने के बजाय पिछले 15–20 वर्षों से कॉन्ट्रैक्ट/आउटसोर्स पर काम कर रहे कर्मचारियों को “स्पेशल कैडर पॉलिसी 2023” के नाम पर नई दलदल में फंसा रही है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह शिक्षकों ने हाल ही में मोहाली में धरना दिया, उसी तरह सरकार कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, परिवहन विभाग को मजबूत करने और किसान–मजदूर–कर्मचारियों की मांगें सुलझाने में विफल रही है। अपनी नाकामी छिपाने के लिए पुलिस-प्रशासन का इस्तेमाल कर आवाज़ दबाई जा रही है।
निजीकरण का आरोप, कॉरपोरेट पक्षपात
यूनियन का आरोप है कि Aam Aadmi Party की सरकार “आम आदमी” का चेहरा दिखाकर सत्ता में आई, लेकिन अब कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचा रही है। चुनाव से पहले कॉरपोरेट के खिलाफ बयान देने वाले मुख्यमंत्री Bhagwant Mann के नेतृत्व में सरकार ने परिवहन विभाग के निजीकरण की दिशा में किलोमीटर स्कीम बसों के टेंडर लाए, जिसका यूनियन लगातार विरोध कर रही है।
Bus Strike in Punjab: 307 जैसी धाराएं, रिहाई नहीं
यूनियन के मुताबिक, विरोध के दौरान नेताओं को घरों और धरनों से उठाकर IPC 307 जैसी धाराएं लगाई गईं और जेल भेजा गया। करीब दो महीने बीतने के बावजूद रिहाई नहीं हुई। सरकार बैठकों में 2–4 दिन में रिहाई का भरोसा देती रही, लेकिन अब शर्तें रखी जा रही हैं—जो अस्वीकार्य हैं।
आंदोलन का ऐलान
- 11 फरवरी: दोपहर बाद से शाम तक बसें बंद (हड़ताल)
- 12 फरवरी: मुख्यमंत्री आवास पर धरना
यूनियन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने टालमटोल जारी रखी तो तेज़ संघर्ष किए जाएंगे। जेल में बंद साथियों की रिहाई और मानी हुई मांगें लागू होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
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