
नई दिल्ली, 22 जून 2026 (वीकैंड रिपोर्ट)- Banned Pesticides in India : भारत में खेती के दौरान इस्तेमाल होने वाले कुछ कीटनाशक और खरपतवारनाशक रसायन एक बार फिर चर्चा में हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और किसान संगठनों का दावा है कि जिन रसायनों पर यूरोप समेत दुनिया के कई देशों में प्रतिबंध लगाया जा चुका है, उनका इस्तेमाल भारत के खेतों में अब भी बड़े पैमाने पर हो रहा है। चिंता इस बात की है कि ये रसायन खेतों से होते हुए खाद्य पदार्थों के जरिए लोगों की थाली तक पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार 2,4-D, पैराक्वाट, ग्लाइफोसेट, एसेफेट और डाइमेथोएट जैसे रसायनों को लेकर लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी सवाल उठते रहे हैं। इनमें से कई रसायनों को WHO की कैंसर अनुसंधान एजेंसी (IARC) ने संभावित या संभव कैंसरकारी श्रेणियों में रखा है।
पैराक्वाट पर सबसे ज्यादा विवाद
पैराक्वाट दुनिया के सबसे विवादित खरपतवारनाशकों में से एक माना जाता है। यूरोपीय संघ ने वर्ष 2007 में इसके कृषि उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था और वर्तमान में कम से कम 74 देशों में यह प्रतिबंधित है। वैज्ञानिक शोधों के मुताबिक इसकी थोड़ी मात्रा भी गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके संपर्क में आने से फेफड़ों को क्षति, किडनी फेल होने और पार्किंसंस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। भारत में किसान संगठनों ने भी इसके उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लगाने की मांग की है। पैराक्वाट पर देशव्यापी प्रतिबंध की मांग से जुड़ी एक याचिका फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
ग्लाइफोसेट पर भी उठ रहे सवाल
ग्लाइफोसेट दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले खरपतवारनाशकों में शामिल है। वर्ष 2015 में WHO की कैंसर एजेंसी ने इसे “संभावित कैंसरकारी” श्रेणी (Group 2A) में रखा था। हालांकि कई नियामक एजेंसियां इसके कैंसर से सीधे संबंध को लेकर अलग राय रखती हैं। इसके बावजूद इस रसायन को लेकर दुनिया भर में बहस जारी है और इससे जुड़े मुकदमों में कई कंपनियों को अरबों डॉलर का भुगतान करना पड़ा है।
Banned Pesticides in India : 2,4-D और एसेफेट भी चिंता का विषय
2,4-D वही रसायन है जो वियतनाम युद्ध के दौरान इस्तेमाल किए गए एजेंट ऑरेंज के प्रमुख घटकों में शामिल था। भारत में इसका उपयोग गेहूं, धान, मक्का और गन्ने की खेती में किया जाता है। वहीं एसेफेट को लेकर वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इसका प्रभाव केवल इंसानों तक सीमित नहीं है बल्कि यह मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले लाभकारी कीड़ों के लिए भी नुकसानदायक साबित हो सकता है। इससे कृषि उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
यूरोप ने 365 भारतीय उत्पादों को किया अस्वीकार
हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, मई 2024 से मई 2026 के बीच यूरोपीय संघ (EU) के सदस्य देशों ने कीटनाशकों और भारी धातुओं के अवशेष मिलने के कारण 365 भारतीय खाद्य उत्पादों को अस्वीकार कर दिया। यह स्थिति भारतीय कृषि निर्यात के लिए चिंता का विषय मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा मानकों को मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि निर्यात और उपभोक्ताओं दोनों का विश्वास बना रहे।
कैंसर के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के अनुसार, वर्ष 2022 में भारत में कैंसर के लगभग 14.6 लाख नए मामले सामने आए थे। अनुमान है कि 2025 तक यह संख्या बढ़कर 15.7 लाख तक पहुंच सकती है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि कैंसर के पीछे कई कारण हो सकते हैं और किसी एक कीटनाशक को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। फिर भी संभावित जोखिम वाले रसायनों के संपर्क को कम करने की दिशा में कदम उठाने की आवश्यकता बताई जा रही है।
Banned Pesticides in India : संतुलन की चुनौती
कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों को फसल सुरक्षा के लिए प्रभावी विकल्पों की जरूरत होती है। वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञ सुरक्षित और आधुनिक विकल्पों को बढ़ावा देने पर जोर दे रहे हैं। ऐसे में नीति निर्माताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती कृषि उत्पादन और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाने की है।
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