

धर्म डेस्क (वीकैंड रिपोर्ट)- Nandi Statue Mystery : कलियुग के अंत और महाप्रलय को लेकर धार्मिक ग्रंथों तथा लोकमान्यताओं में कई कथाएं प्रचलित हैं। इन्हीं मान्यताओं में आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले स्थित उमा महेश्वरी मंदिर की नंदी प्रतिमा का विशेष उल्लेख मिलता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस प्रतिमा का लगातार बढ़ता आकार भविष्य में आने वाले बड़े बदलावों का संकेत है। हालांकि, इन मान्यताओं की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें धार्मिक आस्था के रूप में देखा जाता है।
हर कुछ वर्षों में बढ़ने की मान्यता
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मंदिर में स्थापित नंदी देव की प्रतिमा का आकार समय के साथ धीरे-धीरे बढ़ रहा है। कहा जाता है कि पहले श्रद्धालु आसानी से इसकी परिक्रमा कर लेते थे, लेकिन अब प्रतिमा का आकार पहले की तुलना में काफी बड़ा दिखाई देता है। कुछ लोगों का मानना है कि यदि यह प्रतिमा भविष्य में जीवंत हो जाए तो वह कलियुग के अंतिम समय का संकेत होगा। हालांकि, इस दावे का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
वैज्ञानिक क्या कहते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रतिमा जिस विशेष प्रकार के पत्थर से बनी है, उसमें समय के साथ हल्का प्राकृतिक विस्तार (Expansion) हो सकता है। वैज्ञानिक इसे भू-वैज्ञानिक प्रक्रिया मानते हैं और इसे किसी अलौकिक घटना से जोड़ने की पुष्टि नहीं करते।
Nandi Statue Mystery : रहस्यमयी पुष्करणी कुंड और कौवों की मान्यता
मंदिर परिसर में स्थित पुष्करणी कुंड भी श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र है। धार्मिक मान्यता है कि इसमें लगातार जल आता रहता है और इसका स्रोत आज भी रहस्य बना हुआ है। इसी मंदिर से जुड़ी एक और मान्यता यह भी है कि यहां कौवे दिखाई नहीं देते। लोककथाओं के अनुसार, ऋषि अगस्त्य ने तपस्या में बाधा डालने पर कौवों को श्राप दिया था। हालांकि, इसका भी कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
गुजरात के शिवलिंग से भी जुड़ी है मान्यता
धार्मिक मान्यताओं में गुजरात के मृदेश्वर मंदिर के शिवलिंग का भी उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि इस शिवलिंग का आकार भी धीरे-धीरे बढ़ रहा है। कुछ श्रद्धालु इसे कलियुग के अंतिम चरण से जोड़ते हैं, जबकि वैज्ञानिक इसे प्राकृतिक परिवर्तन मानते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी मान्यताओं को श्रद्धा और धार्मिक विश्वास के रूप में देखा जाना चाहिए। महाप्रलय या कलियुग के अंत को लेकर कोई वैज्ञानिक या आधिकारिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
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